Sawan 2026: सावन शुरू होते ही शिवभक्ति में डूबा राजस्थान; जयपुर के ताड़केश्वर से जोधपुर के अचलेश्वर तक गूंजा 'हर-हर महादेव', जानें इस महीने के सबसे शुभ दिन
हिंदू धर्म का सबसे पवित्र और देवों के देव महादेव की आराधना का पसंदीदा महीना श्रावण (सावन) 30 जुलाई 2026 से शुरू हो चुका है। सावन की शुरुआत के साथ ही पूरा राजस्थान पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में डूब गया है। राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक ताड़केश्वर महादेव, जोधपुर के अचलेश्वर महादेव, उदयपुर के अमरख महादेव और कोटा के कंसुआ शिवालय सहित प्रदेश के तमाम छोटे-बड़े शिव मंदिरों में सुबह तड़के (ब्रह्म मुहूर्त) से ही कांवड़ियों और आम भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
ॐ नमः शिवाय और 'हर-हर महादेव' के जयकारों के साथ भक्त भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और बेलपत्र अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल का सावन बेहद खास है क्योंकि इसकी शुरुआत कई दुर्लभ राजयोगों (जैसे शश, हंस और गुरु-आदित्य योग) के महासंयोग के साथ हुई है।
इस बार सावन में मिलेंगे 4 सोमवार, देखें पूरी लिस्ट
राजस्थान सहित पूरे उत्तर भारत में इस साल सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 (श्रावण पूर्णिमा) तक रहेगा। इस दौरान महादेव की विशेष कृपा बरसाने वाले कुल 4 सावन सोमवार पड़ रहे हैं:
-
पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026 (इस दिन सुकर्मा योग का बेहद शुभ संयोग बन रहा है)
-
दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
-
तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
-
चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026
धार्मिक मान्यता: सावन सोमवार के दिन व्रत रखने और प्रदोष काल (शाम के समय) में भगवान शिव व माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक जीवन के कष्ट दूर होते हैं और अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है।
सावन 2026 के अन्य सबसे शुभ और महत्वपूर्ण दिन
सोमवार के अलावा पूरे श्रावण मास में कुछ ऐसी विशेष तिथियां आ रही हैं, जिनमें दान-पुण्य, कालसर्प दोष निवारण पूजा और शिव आराधना का फल हजार गुना बढ़ जाता है:
| शुभ तिथि | त्योहार / पर्व | धार्मिक महत्व और विशेषता |
| 11 अगस्त 2026 | सावन शिवरात्रि | इस दिन त्रयोदशी तिथि पर व्रत रखकर रात्रि के चारों प्रहर में किया गया जलाभिषेक हर संकट को हर लेता है। |
| 12 अगस्त 2026 | हरियाली अमावस्या | राजस्थान में इस दिन का विशेष महत्व है। पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाना और पितरों के तर्पण के लिए यह सर्वश्रेष्ठ दिन है। |
| 15 अगस्त 2026 | हरियाली तीज | जयपुर की प्रसिद्ध पारंपरिक 'तीज माता की सवारी' इसी दिन निकाली जाएगी। सुहागिन महिलाओं के लिए यह सबसे बड़ा उत्सव है। |
शिव पूजा के दौरान इन 3 बातों का जरूर रखें ध्यान
नियम और शुचिता के साथ की गई पूजा भोलेनाथ को तुरंत प्रसन्न करती है। इसलिए जलाभिषेक करते समय इन बातों को न भूलें:
-
दिशा का ध्यान: शिवलिंग की पूजा करते समय हमेशा आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
-
पात्र का चयन: जल या गंगाजल चढ़ाने के लिए तांबे (Copper) के लोटे का उपयोग सबसे उत्तम माना जाता है। लेकिन याद रखें, तांबे के पात्र से कभी भी दूध या पंचामृत नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि तांबा दूध के साथ मिलकर रासायनिक प्रक्रिया करता है जो वर्जित है। दूध के लिए पीतल या चांदी के बर्तन का उपयोग करें।
-
क्या न चढ़ाएं: शिवजी की पूजा में कभी भी केतकी का फूल, तुलसी के पत्ते, शंख से जल और सिंदूर/हल्दी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। बेलपत्र चढ़ाते समय हमेशा उसका चिकना हिस्सा शिवलिंग की तरफ रखें।