पंचायत चुनाव में इतने लाख से ज्यादा खर्च किया तो 6 साल के लिए होंगे बैन, जारी हुए सख्त नियम

पंचायत चुनाव में इतने लाख से ज्यादा खर्च किया तो 6 साल के लिए होंगे बैन, जारी हुए सख्त नियम

Rajasthan Panchayat Chunav Guidelines 2026: पंचायती राज संस्थाओं के चुनावी समर में ताल ठोकने की तैयारी कर रहे भावी उम्मीदवारों के लिए निर्वाचन आयोग ने कड़े दिशा-निर्देश और आचार संहिता के नियम तय कर दिए हैं। यदि आप भी सरपंच, पंचायत समिति सदस्य या जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं, तो प्रचार शुरू करने से पहले आयोग के कायदे-कानूनों को बारीकी से समझ लेना बेहद जरूरी है।

प्रचार के दौरान की गई एक छोटी सी लापरवाही या नियमों की अनदेखी न केवल आपकी जेब पर भारी पड़ेगी, बल्कि निर्वाचन आयोग आपको 6 साल के लिए चुनावी राजनीति से बेदखल (अयोग्य घोषित) भी कर सकता है।

चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा तय: कौन कितना खर्च कर सकता है?

छह साल के लंबे अंतराल के बाद होने जा रहे पंचायती राज चुनावों में काले धन और फिजूलखर्ची पर नकेल कसने के लिए आयोग ने प्रत्येक पद के अनुसार खर्च की लक्ष्मण रेखा खींच दी है। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक गाइडलाइन के अनुसार, जिला परिषद सदस्य पद का प्रत्याशी अधिकतम 3 लाख रुपये तक ही चुनावी खर्च कर सकेगा। वहीं पंचायत समिति सदस्य के लिए यह अधिकतम सीमा 1.50 लाख रुपये और ग्राम पंचायत के सरपंच पद के उम्मीदवार के लिए चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा 1 लाख रुपये तय की गई है। प्रत्याशियों को पाई-पाई का हिसाब रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा।

वाहनों के काफिले पर अंकुश: सरपंच सिर्फ 1 गाड़ी से कर सकेंगे प्रचार

चुनावी शक्ति प्रदर्शन के नाम पर गाड़ियों के लंबे-चौड़े काफिले निकालने वाले दावेदारों पर भी आयोग ने पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। प्रचार के दौरान वाहनों के इस्तेमाल की स्पष्ट संख्या निर्धारित की गई है। जिला परिषद सदस्य चुनाव के लिए अधिकतम 3 वाहनों की अनुमति होगी, जबकि पंचायत समिति सदस्य के प्रत्याशी अधिकतम 2 वाहनों का इस्तेमाल कर सकेंगे। वहीं सरपंच पद के उम्मीदवार को पूरे प्रचार के दौरान सिर्फ 1 वाहन प्रयोग करने की इजाजत दी गई है। इसके अलावा प्रचार में भारी वाहनों जैसे बस, ट्रक, मिनी बस और पशु-चालित गाड़ियों (बैलगाड़ी, ऊंटगाड़ी आदि) के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पर पाबंदी

प्रचार के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर व साउंड बॉक्स) के उपयोग को लेकर भी सख्त गाइडलाइन जारी की गई है। रात 10:00 बजे से लेकर सुबह 06:00 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके अलावा शांत क्षेत्रों (साइलेंस जोन) जैसे कि अस्पताल, स्कूल और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में लाउडस्पीकर से प्रचार करने की कतई अनुमति नहीं होगी। प्रत्याशियों को अपने जनसंपर्क और चुनावी सभाओं का समय निर्धारित करते समय इन पाबंदियों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।

पोस्टर-बैनर के लिए लिखित अनुमति जरूरी, बूथ के पास नो-प्रमोशन जोन

सार्वजनिक या निजी संपत्तियों पर बिना अनुमति प्रचार सामग्री चिपकाने पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी सार्वजनिक स्थल, बिजली के पोल या निजी मकान की दीवार पर पोस्टर, होर्डिंग या बैनर लगाने से पहले संबंधित प्रशासनिक अधिकारी अथवा संबंधित मकान मालिक की लिखित सहमति हासिल करनी होगी। इसके अलावा, मतदान दिवस के दिन निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदान केंद्र (Polling Booth) के 200 मीटर के दायरे में किसी भी तरह की प्रचार सामग्री लगाने या झंडे लहराने पर सख्त पाबंदी लागू रहेगी।

15 दिनों में देना होगा पाई-पाई का ब्योरा, नियम तोड़े तो 6 साल की अयोग्यता

चुनाव खत्म होने के बाद प्रत्याशियों की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी। चुनाव परिणाम घोषित होने के ठीक 15 दिनों के भीतर प्रत्येक उम्मीदवार को अपने कुल चुनावी खर्च का विस्तृत और प्रमाणित लेखा-जोखा निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। निर्धारित खर्च सीमा (जिला परिषद के लिए ₹3 लाख, पंचायत समिति के लिए ₹1.5 लाख और सरपंच के लिए ₹1 लाख) का उल्लंघन करने या समय पर चुनावी खर्च का ब्योरा न देने पर आयोग ने दंडात्मक प्रावधान किए हैं। नियमों की अनदेखी पर 2,000 रुपये तक के आर्थिक जुर्माने के साथ-साथ दोषी उम्मीदवार को 6 साल की अवधि के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है।