सर्जरी की तारीखें आती रहीं, ऑपरेशन नहीं हुआ... 14 साल बाद बच्ची की मौत

सर्जरी की तारीखें आती रहीं, ऑपरेशन नहीं हुआ... 14 साल बाद बच्ची की मौत

देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS, New Delhi) से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। राजस्थान के कोटा निवासी मुकेश पारियानी अपनी बेटी तन्वी के दिल का इलाज कराने की आस लेकर वर्ष 2012 में दिल्ली पहुंचे थे। उस वक्त मासूम की उम्र महज दो साल थी।

अस्पताल की चौखट पर बेहतर जिंदगी की उम्मीद लिए परिवार ने 14 साल गुजार दिए, लेकिन मंगलवार तड़के 16 वर्षीय तन्वी ने दम तोड़ दिया। किशोरी की मौत के बाद अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया और परिजनों ने डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

2 साल की उम्र से चल रहा था इलाज, नहीं हो सकी सर्जरी

कोटा से आई मासूम तन्वी के जन्मजात हृदय रोग (वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट यानी दिल में छेद और पल्मोनरी एट्रेसिया) से पीड़ित होने की पुष्टि जांच में हुई थी। वर्ष 2014 के चिकित्सकीय दस्तावेजों के हवाले से परिजनों का कहना है कि उस वक्त डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह देते हुए करीब 1.2 लाख रुपये का खर्च बताया था।

पिता मुकेश पारियानी के मुताबिक 2015 में सर्जरी की तारीखें भी तय हुईं, लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से ऑपरेशन टलता रहा और आखिरकार सर्जरी कभी नहीं हो सकी। तारीखों के इस लंबे इंतजार के बीच साल दर साल बच्ची की सेहत और नाजुक होती चली गई।

शारीरिक जटिलता बनी रुकावट, एम्स के डॉक्टरों की सफाई

अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों का पक्ष इस मामले में बिल्कुल अलग है। सीटीवीएस (कार्डियो थोरैसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी) विभाग के प्रमुख डॉ. वी. देवागुरु के अनुसार वर्ष 2018 में रिपोर्ट के गहन विश्लेषण के बाद यह पाया गया था कि तन्वी की शारीरिक संरचना बेहद जटिल थी। जांच में फेफड़ों तक खून ले जाने वाली मुख्य धमनियां गायब पाई गई थीं, जिससे सर्जरी करना जानलेवा साबित हो सकता था।

इसी कारण डॉक्टरों ने जोखिम न लेते हुए दवाओं के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का रास्ता चुना था। हाल ही में 24 अगस्त को किशोरी को हार्ट और लंग्स ट्रांसप्लांट के मूल्यांकन हेतु भर्ती किया गया था और उसी प्रक्रिया के तहत सोमवार शाम एंडोस्कोपी की गई थी।

तड़के 48% तक गिरा ऑक्सीजन स्तर, पड़ा दिल का दौरा

मेडिकल बुलेटिन के अनुसार मंगलवार तड़के करीब 2:50 बजे किशोरी को अचानक तेज कमजोरी और थकान महसूस हुई। कुछ ही मिनटों में उसका ऑक्सीजन लेवल गिरकर 48 फीसदी पर आ गया और ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण शरीर नीला पड़ने लगा। तड़के 3:30 बजे डॉक्टरों ने उसे आपातकालीन ऑक्सीजन सपोर्ट दिया, लेकिन गंभीर हाइपोक्सिक स्पेल की वजह से उसे अचानक कार्डियक अरेस्ट आ गया। डॉक्टरों के मुताबिक तमाम इमरजेंसी प्रयासों के बावजूद बच्ची को बचाया नहीं जा सका।

साजिश का अंदेशा और निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े परिजन

बेटी को खो चुके पिता मुकेश पारियानी ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका सीधा आरोप है कि सोमवार शाम एंडोस्कोपी जांच के बाद से ही तन्वी की तबीयत तेजी से बिगड़ी, जिसे नजरअंदाज किया गया। पिता का कहना है कि गंभीर हालत में भी उन पर दस्तावेजों और डिस्चार्ज को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। मौत की स्पष्ट वजह सामने न आने से आक्रोशित परिजनों ने मामले में साजिश की आशंका जताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और मांगें पूरी न होने तक शव लेने से साफ इनकार कर दिया है।