BJP के 10 पार्षद, फिर भी प्रत्याशी को 0 वोट! राजस्थान की इस सीट पर हुआ चौंकाने वाला खेल
राजस्थान के निकाय चुनावों में अक्सर कम सीटें होने के बावजूद जोड़-तोड़ से बोर्ड बना लेने वाली भारतीय जनता पार्टी को नागौर जिले में अप्रत्याशित और बेहद शर्मनाक राजनीतिक झटके का सामना करना पड़ा है।
राजधानी जयपुर से करीब 250 किलोमीटर दूर नागौर की मूंडवा नगरपालिका में सबसे बड़ा दल बनकर उभरने के बाद भी भाजपा न सिर्फ चेयरमैन की कुर्सी गंवा बैठी, बल्कि उसके आधिकारिक प्रत्याशी को एक भी वोट नसीब नहीं हुआ। पार्टी के सभी निर्वाचित पार्षदों द्वारा सामूहिक क्रॉस वोटिंग किए जाने से भगवा दल का खाता तक नहीं खुला और कांग्रेस व हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के गठबंधन ने बाजी मार ली।
मूंडवा में ऐसे पलटा पासा: 1 वोट के अंतर से तय हुई जीत
कुल 25 वार्डों वाली मूंडवा नगरपालिका में चेयरमैन पद के लिए सोमवार को हुई वोटिंग बेहद नाटकीय और सांसें थाम देने वाली रही। कांग्रेस और आरएलपी की साझा उम्मीदवार अलका देवी कंडोई ने 13 पार्षदों का समर्थन जुटाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। दूसरी तरफ, भाजपा से बगावत कर निर्दलीय ताल ठोकने वाले पूर्व भाजपा नेता घनश्याम सदावत को 12 वोट मिले और वे महज एक वोट के बेहद करीबी अंतर से मुकाबला हार गए। इस पूरे चुनावी मुकाबले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी गीता देवी को खुद का वोट भी नहीं मिला और वे शून्य पर सिमट गईं।
नंबर गेम में सबसे आगे थी भाजपा, फिर भी हुआ सूपड़ा साफ
मूंडवा निकाय चुनाव के मूल नतीजों में भाजपा ने सबसे ज्यादा 10 वार्डों में जीत दर्ज कर अपना दबदबा साबित किया था। वहीं हनुमान बेनीवाल की आरएलपी को 7, कांग्रेस को 3 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 5 सीटों पर विजय मिली थी। चेयरमैन पद पर कब्जा जमाने के लिए कांग्रेस और आरएलपी ने तुरंत चुनावी हाथ मिलाया और अलका देवी को अपना साझा प्रत्याशी घोषित कर दिया। कागजों पर आरएलपी के 7 और कांग्रेस के 3 मिलाकर गठबंधन के पास सिर्फ 10 वोट थे, लेकिन मतदान के दौरान अलका देवी 13 वोट हासिल करने में सफल रहीं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, भाजपा के पार्षदों और निर्दलीयों की टूट ने गठबंधन के पक्ष में काम किया।
ज्योति मिर्धा के करीबी बागी घनश्याम सदावत ने दी कांटे की टक्कर
भाजपा भले ही चेयरमैन की सीधी दौड़ से बाहर हो गई, लेकिन भाजपा के बागी और वरिष्ठ नेता डॉ. ज्योति मिर्धा के करीबी माने जाने वाले घनश्याम सदावत ने मुकाबले को पूरी तरह एकतरफा नहीं होने दिया। पूर्व में भी पार्षद रह चुके सदावत टिकट कटने से नाराज होकर निर्दलीय मैदान में उतरे थे। उन्होंने भाजपा पार्षदों और अन्य निर्दलीयों के बूते 12 वोट जुटा लिए, जिससे मुकाबला बेहद कड़ा हो गया। भाजपा नेतृत्व ने इस बार सदावत की अनदेखी कर गीता देवी पर दांव लगाया था, लेकिन पार्टी के इस फैसले से कार्यकर्ताओं में ऐसी नाराजगी फैली कि सभी 10 पार्षदों ने अधिकृत प्रत्याशी के बजाय बागी और विपक्षी खेमे में वोट बांट दिए।