शिक्षा की नगरी कोटा में थमता नहीं हादसों का सिलसिला: अब दूसरी मंजिल से गिरी नीट की छात्रा

शिक्षा की नगरी कोटा में थमता नहीं हादसों का सिलसिला: अब दूसरी मंजिल से गिरी नीट की छात्रा

मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए देश भर में मशहूर कोटा शहर अक्सर छात्रों से जुड़ी बुरी खबरों को लेकर चर्चा में रहता है। यहां पढ़ाई के भारी दबाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार बहस होती रहती है।

इसी बीच कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र से एक और डरावना वाकया सामने आया है। यहां एक सत्रह वर्षीय छात्रा इमारत की दूसरी मंजिल से सीधे नीचे आ गिरी। इस घटना ने दूर दराज से अपने बच्चों को कोटा भेजने वाले अभिभावकों की चिंता को और गहरा कर दिया है।

हाईटेंशन लाइन से टकराने के बावजूद बची जान

यह खौफनाक घटना शुक्रवार सुबह करीब ग्यारह बजे लैंडमार्क सिटी इलाके में घटी। यह छात्रा मूल रूप से बिहार की रहने वाली है। वह महज दो महीने पहले ही डॉक्टर बनने का सपना लेकर नीट की कोचिंग के लिए कोटा आई थी। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें गिरने का पूरा दृश्य दिखाई दे रहा है।

थाना प्रभारी देवेश भारद्वाज ने बताया कि गिरने के दौरान छात्रा बीच में मौजूद 11 केवी की हाईटेंशन बिजली लाइन से टकरा गई थी। छात्रा के वजन से वह बिजली का तार टूट गया। गनीमत रही कि उसे करंट नहीं लगा और एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि ऊंचाई से सड़क पर गिरने के कारण उसके पैर की हड्डी टूट गई है। उसे तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है।

हादसा या छलांग? जांच में जुटी पुलिस

इस घटना के बाद इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस मौके पर पहुंचकर हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि छात्रा गलती से नीचे गिरी या फिर उसने मानसिक दबाव में आकर खुद छलांग लगाई। सच्चाई जानने के लिए पुलिस आसपास के लोगों और हॉस्टल के अन्य छात्रों से पूछताछ कर रही है।

जून में भी सामने आया था दर्दनाक मामला

कोटा में छात्रों के साथ होने वाले ऐसे हादसे कोई नई बात नहीं हैं। इसी साल जून में राजीव गांधी नगर इलाके के एक पीजी में रहने वाले सत्रह साल के छात्र आर्यन ओझा ने अपनी जान दे दी थी। उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर का रहने वाला आर्यन इसी साल फरवरी से जेईई प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था।

डीएसपी योगेश शर्मा के मुताबिक तीन जून की रात अन्य छात्रों ने आर्यन का शव पंखे से लटकता देखा था। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके कमरे से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला था। इससे यह पता ही नहीं चल सका कि आखिर किन हालात ने उसे यह खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर किया। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने कोटा के कोचिंग सिस्टम और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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