दलेर कलेक्टर का अनोखा अंदाज: अचानक स्कूल पहुंचे और खुद बन गए छात्र, देखकर दंग रह गए शिक्षक
क्लास में शिक्षक अपनी धुन में पढ़ा रहे थे और बच्चे पूरी तन्मयता से पाठ सुन रहे थे। तभी अचानक दरवाजा खुला और जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी यानी जिला कलेक्टर मुहम्मद जुनेद पी.पी. चुपचाप अंदर दाखिल हुए। सबको यही लगा कि अब कोई कड़ा औपचारिक निरीक्षण शुरू होगा, लेकिन अगले ही पल जो हुआ उसने पूरे स्कूल का माहौल ही बदल कर रख दिया।
कलेक्टर साहब सीधे बच्चों के बीच पहुंचे, एक खाली बेंच पर आराम से बैठ गए और मुस्कुराते हुए बोले कि आज वे भी छात्र बनकर पढ़ाई का आनंद लेना चाहते हैं।
बच्चों के साथ खुलकर की चर्चा और बढ़ाए हौसले
बुधवार के दिन पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, मुंडला में हुआ यह अनोखा औचक निरीक्षण छात्र-छात्राओं के लिए जिंदगी भर का यादगार पल बन गया। कलेक्टर ने कक्षा के भीतर बैठकर पूरी शिक्षण व्यवस्था को बहुत बारीकी से परखा और बच्चों की सीखने की काबिलियत को करीब से देखा।
शुरुआती कुछ पलों में तो बच्चे थोड़े संकोच में डूबे रहे, लेकिन कलेक्टर के दोस्ताना अंदाज ने चंद मिनटों में सारा डर दूर कर दिया और माहौल पूरी तरह सहज हो गया।
इसके बाद उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई, पसंद के विषयों, स्कूल की गतिविधियों और उनके भविष्य के सपनों पर लंबी बातचीत की। विद्यार्थियों ने भी बिना किसी झिझक के पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य सामने रखे। किसी ने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई तो किसी ने शिक्षक और पुलिस अधिकारी बनने का सपना साझा किया। जिला कलेक्टर ने हर एक बच्चे की पीठ थपथपाते हुए उनका उत्साह बढ़ाया और समझाया कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और नियमित पढ़ाई से दुनिया का हर सपना सच किया जा सकता है।
डिजिटल शिक्षा और पर्यावरण पर खास जोर
पढ़ाई के तौर-तरीकों का जायजा लेने के बाद उन्होंने स्कूल के शिक्षकों और स्टाफ से बातचीत करके मौजूदा संसाधनों की पूरी जानकारी ली। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि विद्यालय में टेलीविजन समेत तमाम जरूरी डिजिटल हार्डवेयर की व्यवस्था जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए ताकि बच्चों को आधुनिक तकनीक के जरिए बेहतरीन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
स्कूल कैंपस में उन्होंने पर्यावरण को बचाने का अहम संदेश भी दिया। बच्चों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि हर छात्र का यह कर्तव्य होना चाहिए कि वह अपने घर या आसपास कम से कम एक पेड़ जरूर लगाए और उसकी देखरेख करे। उन्होंने समझाया कि हमारी छोटी-छोटी कोशिशें ही मिलकर भविष्य में बड़ा बदलाव लाती हैं।