स्कूली बच्चों के हाथों में तिरंगा और नम आंखें, झुंझुनूं के लाल रमन लांबा की अंतिम विदाई
देश की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों की गाथाएं जब सामने आती हैं, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, लेकिन साथ ही आंखें नम भी हो जाती हैं। राजस्थान के झुंझुनूं जिले से इस वक्त देश के नाम एक बेहद मर्मस्पर्शी, दिल को झकझोर देने वाली और आंखें नम कर देने वाली खबर सामने आई है, जहां देश की सरहद पर मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हुए लांस नायक रमन लांबा (Martyr Raman Lamba) की पार्थिव देह जब उनके पैतृक गांव पहुंची, तो पूरा इलाका गमगीन हो गया। शहीद की अंतिम विदाई के इस विचलित कर देने वाले और भावुक पल में किसी भी शख्स की आंखें सूखी नहीं रह पाईं। स्कूल के नन्हें-मुन्ने बच्चों के हाथों में तिरंगा झंडा थामे और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ जब अपने लाडले को अंतिम विदाई देने पूरा गांव सड़कों पर उतर आया, तो माहौल पूरी तरह से देशभक्ति और आंसुओं के समंदर में डूब गया। आइए जानते हैं झुंझुनूं के इस जांबाज सपूत के सर्वोच्च बलिदान और उनकी इस अंतिम यात्रा से जुड़ी हर एक भावुक कर देने वाली पूरी कहानी।
Emotional Homecoming in Jhunjhunu: तिरंगे में लिपटकर जब घर लौटे झुंझुनूं के वीर सपूत, परिजनों की चीख-पुकार से दहल उठा पूरा आसमान
देश के वीर जांबाज रमन लांबा की शहादत की खबर जब उनके पैतृक गांव पहुंची थी, तब से ही पूरे इलाके में चूल्हे नहीं जले थे और हर घर में मातम पसरा हुआ था। मंगलवार को जब शहीद की पार्थिव देह सेना के विशेष वाहन से उनके गांव लाई गई, तो उनके अंतिम दर्शन करने के लिए आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में लोग सड़कों के दोनों किनारों पर घंटों पहले ही खड़े हो गए थे। जैसे ही तिरंगे में लिपटे वीर सपूत का ताबूत उनके घर के आंगन में पहुंचा, वहां मौजूद माता-पिता, पत्नी, भाई-बहनों और रिश्तेदारों की चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद हर एक पत्थर दिल इंसान का कलेजा भी दहल गया। एक मां के लिए अपने जवान बेटे की अर्थी को कंधा देना और एक जीवनसंगिनी के लिए अपने सुहाग का इस तरह दुनिया से चले जाना दुनिया का सबसे बड़ा और असहनीय दर्द होता है, जिसे बयां करने के लिए शब्द भी कम पड़ रहे थे। सेना के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने भी पूरी सैन्य सम्मान के साथ शहीद को अपनी गार्ड ऑफ ऑनर दी और उनके इस अतुलनीय शौर्य को नमन किया।
School Children and Youth Tribute: स्कूली बच्चों ने हाथों में तिरंगा लेकर नम आंखों से दी अंतिम विदाई, गूंज उठा 'रमन लांबा अमर रहे' का गगनभेदी नारा
शहीद रमन लांबा की इस अंतिम यात्रा का सबसे प्रेरणादायक और भावुक दृश्य वह था जब गांव के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के सैकड़ों छोटे-छोटे स्कूली बच्चों ने अपने हाथों में तिरंगा झंडा लेकर अपनी कतारें बनाईं और नम आंखों से अपने वीर भैया को अंतिम विदाई दी। इन मासूम बच्चों के चेहरों पर जहां एक तरफ देश के प्रति अगाध प्रेम और गर्व का भाव साफ झलक रहा था, वहीं दूसरी तरफ उनके आंखों से बहते आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे कि वे अपने इलाके के इस सच्चे हीरो के जाने से कितने आहत हैं। युवाओं ने बाइकों और गाड़ियों पर तिरंगे लगाकर 'जब तक सूरज चांद रहेगा, रमन लांबा का नाम रहेगा' और 'भारत माता की जय' के ऐसे गगनभेदी नारे लगाए कि पूरा आसमान गूंज उठा। हर कोई अपने इस लोकप्रिय और मिलनसार लाडले की एक झलक पाने के लिए बेताब दिखाई दे रहा था, और हर आंख नम थी कि देश ने एक ऐसा होनहार और कर्तव्यनिष्ठ बेटा खो दिया है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।
Supreme Sacrifice for Motherland: सर्वोच्च बलिदान देकर अमर हो गए लांस नायक रमन लांबा, देश हमेशा रखेगा उनके इस ऋण को याद
भारतीय सेना में अपनी सेवा देते हुए देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले लांस नायक रमन लांबा का यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का एक महान स्रोत बना रहेगा। सैन्य सेवा के दौरान उनके अदम्य साहस, अनुशासन और कर्तव्यपरायणता की मिसाल उनके अधिकारी भी देते नहीं थकते। इस दुख की घड़ी में पूरा देश और राजस्थान सरकार शहीद के परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है। जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी शहीद की पार्थिव देह पर पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और कहा कि राष्ट्र हमेशा इन अमर शहीदों के परिवारों के कल्याण और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। नम आंखों और भारी मन से अंततः राजकीय सम्मान के साथ शहीद रमन लांबा का अंतिम संस्कार संपन्न किया गया, जहां हर शख्स ने आंखें नम करके अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।