उदयपुर निकाय चुनाव: मेयर की कुर्सी के लिए बीजेपी में पर्ची से रायशुमारी तेज
राजस्थान के राजनीतिक पटल पर ऐतिहासिक नगरी उदयपुर (Udaipur) से इस वक्त एक बहुत बड़ी और दिलचस्प खबर सामने आ रही है, जहां स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे आने के बाद अब मेयर (महापौर) की कुर्सी को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। उदयपुर नगर निगम के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए अपने दम पर स्पष्ट बोर्ड बना लिया है, जिसके बाद से पार्टी के भीतर मेयर पद की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए दिग्गजों के बीच लॉबिंग और मंथन का दौर तेज हो गया है। पार्टी संगठन द्वारा नवनिर्वाचित पार्षदों की बाड़ेबंदी कर गुप्त तरीके से पर्ची पर नाम लिखवाकर रायशुमारी करने की अनोखी प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे सियासी पारा और अधिक हाई हो गया है। खास तौर पर दो दिग्गज और वरिष्ठ नेता दिनेश भट्ट (Dinesh Bhatt) और प्रमोद सामर (Pramod Samar) के बीच मेयर की रेस को लेकर मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा हो गया है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि उदयपुर के इस हाई-वोल्टेज राजनीतिक ड्रामे के पीछे क्या समीकरण हैं और पार्टी किस फॉर्मूले के तहत ताज पहनने वाले चेहरे का चयन कर रही है।
उदयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी की बंपर जीत और पार्षदों की गुप्त बाड़ेबंदी की पूरी अंदरूनी कहानी
हाल ही में संपन्न हुए उदयपुर नगर निगम के कुल 80 वार्डों के चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 53 सीटों पर बंपर जीत दर्ज की है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को काफी पीछे संतोष करना पड़ा है। पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद से ही शहर के राजनीतिक गलियारों और हाईवे किनारे स्थित एक सुरक्षित होटल में सभी 53 नवनिर्वाचित पार्षदों की बाड़ेबंदी कर दी गई है। पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकारों और पर्यवेक्षकों की देखरेख में इन सभी पार्षदों से एक गोपनीय प्रक्रिया के तहत पर्ची पर अपनी पसंद के तीन-तीन नाम लिखवाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार के आंतरिक विवाद या मनमुटाव से बचा जा सके। इस अनूठी 'पर्ची प्रणाली' के जरिए संगठन यह टटोलने की कोशिश कर रहा है कि जमीन पर पार्षदों का सबसे ज्यादा समर्थन किस चेहरे के साथ है, जिससे उदयपुर की जनता को एक सर्वमान्य और मजबूत मेयर दिया जा सके।
दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर के बीच कड़ी टक्कर: संगठन के अनुभव और जातीय समीकरणों का गणित
मेयर पद की इस रेस में जिन दो सबसे प्रमुख और शक्तिशाली चेहरों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं, उनमें पार्टी के वरिष्ठ नेता दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर का नाम सर्वोपरि है। दिनेश भट्ट अपने लंबे संगठनात्मक अनुभव, बेदाग छवि और पार्टी के विभिन्न पदों पर तनिष्ठा से काम करने के लिए जाने जाते हैं, जिन्हें ब्राह्मण समुदाय का एक मजबूत और निर्विवाद चेहरा माना जा रहा है। दूसरी तरफ, प्रमोद सामर का राजनीतिक कद भी कम नहीं है; वे लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय हैं और सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। जैन समुदाय से ताल्लुक रखने वाले प्रमोद सामर की केंद्रीय और राज्य स्तर के कई बड़े नेताओं तक मजबूत पकड़ मानी जाती है। इन दोनों दिग्गजों के बीच चल रही इस रस्साकशी ने पार्टी के भीतर भी खेमेबंदी को हवा दे दी है, और हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक है कि आखिरकार बाजी किसके हाथ लगेगी।
अन्य दावेदारों की भी है पैनी नजर: पारस सिंघवी और अतुल चंडालिया की सुगबुगाहट
दिग्गज नेताओं दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर के अलावा उदयपुर नगर निगम के इस राजनीतिक समीकरण में पूर्व डिप्टी मेयर पारस सिंघवी और युवा नेता अतुल चंडालिया जैसे नाम भी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। यदि पार्टी शीर्ष नेतृत्व आयु वर्ग, क्षेत्रीय संतुलन या किसी अन्य सामाजिक समीकरण को साधने का प्रयास करता है, तो इन नामों को भी डिप्टी मेयर या अन्य महत्वपूर्ण पदों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। पार्षदों के बीच चल रही बैठकों और मुलाकातों का दौर यह बता रहा है कि उदयपुर का अगला प्रथम नागरिक कौन होगा, इसका अंतिम फैसला पूरी तरह से पार्टी के केंद्रीय और प्रांतीय नेतृत्व की मुहर पर निर्भर करेगा, जो किसी भी वक्त सार्वजनिक हो सकता है।
शहर के विकास और जनता की उम्मीदों पर टिकी हैं सबकी निगाहें
राजनीतिक उठापटक और खेमेबंदी के इस दौर के बीच उदयपुर की आम जनता का ध्यान इस बात पर है कि नया मेयर शहर की बुनियादी समस्याओं, पर्यटन विकास और सीवर-सड़क जैसी प्राथमिकताओं को कितनी तेजी से हल करता है। बीजेपी के पास प्रचंड बहुमत है, इसलिए पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की गुटबाजी को दरकिनार कर एक ऐसा नेतृत्व सामने लाना होगा जो सभी पार्षदों को साथ लेकर चल सके। आने वाले कुछ ही घंटों में पर्ची पर हुई इस रायशुमारी का परिणाम सामने आ जाएगा और यह तय हो जाएगा कि उदयपुर की इस ऐतिहासिक कुर्सी पर आखिरकार किसका ताज सजेगा।