खाकी और हौसले की जीत: बहन को हुआ कैंसर तो भाई ने डॉक्टर बनने का ठान लिया, कोटा के सागर ने क्रैक किया NEET

खाकी और हौसले की जीत: बहन को हुआ कैंसर तो भाई ने डॉक्टर बनने का ठान लिया, कोटा के सागर ने क्रैक किया NEET

मुश्किल हालात और विपरीत परिस्थितियां इंसान के इरादों को या तो तोड़ देती हैं या फिर उन्हें फौलाद बना देती हैं। राजस्थान के कोटा जिले के कैथून कस्बे के रहने वाले सागर ने इस बात को पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है। परिवार पर जब दुखों का पहाड़ टूटा और छोटी बहन को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया, तब साधारण परिवार से ताल्लुक रखने والے सागर ने हार मानने के बजाय एक ऐसा कड़ा संकल्प लिया जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। भाई के अटूट प्रेम, डॉक्टर बनने के जिद और दिन-रात की कड़ी मेहनत के दम पर आखिरकार सागर ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET क्रैक कर ली है।

बहन की बीमारी से मिला जीवन बदलने वाला टर्निंग पॉइंट

सागर का यह सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, लेकिन इसका हर एक पन्ना संघर्ष और सच्चाई की दास्तान बयां करता है। कुछ साल पहले जब उनकी छोटी बहन को कैंसर जैसी भयानक बीमारी होने का पता चला, तो पूरा परिवार अंदर से टूट गया था। इलाज के दौरान अस्पताल के चक्कर काटते हुए सागर ने डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप बनते देखा। उन्होंने महसूस किया कि एक डॉक्टर किस तरह न सिर्फ मरीज को नई जिंदगी देता है बल्कि पूरे परिवार को दर्द से उभारता है। उसी अस्पताल के कमरों और वार्डों के बीच खड़े होकर युवा सागर ने यह कसम खाई थी कि वह डॉक्टर बनकर अपनी बहन की तरह अन्य जरूरतमंद मरीजों की जान बचाएंगे।

आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी को नहीं बनने दिया बाधा

कैथून जैसे छोटे कस्बे में रहकर नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की तैयारी करना आसान काम नहीं था। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण थी और महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस भरना उनके बूते से बाहर था। लेकिन सागर के हौसले के आगे पैसों की तंगी और संसाधन की कमियां हमेशा छोटी पड़ गईं। उन्होंने बिना कोचिंग के सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन माध्यमों का सहारा लिया। दिन के कई-कई घंटे किताबों के बीच बिताना, नोट्स बनाना और लगातार मॉक टेस्ट देकर अपनी कमियों को सुधारना उनकी रोजमर्रा की आदत बन गई थी। परिवार की जिम्मेदारी और बहन के संघर्ष को अपनी ताकत बनाते हुए उन्होंने कभी भी थकान को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।

सफलता के बाद परिवार में खुशी की लहर और नया सवेरा

नीट परीक्षा का परिणाम आने के बाद जब सागर का सिलेक्शन मेडिकल कॉलेज में होने की खबर आई, तो कैथून स्थित उनके घर में खुशियों का सैलाब उमड़ पड़ा। जिस बहन की बीमारी को देखकर उन्होंने डॉक्टर बनने की ठानी थी, आज उसी बहन और माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे। सागर की इस सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार के संघर्षों को एक सुखद अंत दिया है, बल्कि कोटा और कैथून के युवाओं के लिए भी एक मिसाल पेश की है। साबित कर दिया है कि अगर इरादे पक्के हों और मकसद नेक हो, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको आपके लक्ष्य को हासिल करने से नहीं रोक सकती।

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