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Up kiran,Digital Desk : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने छोटे कारोबारियों और किसानों को बड़ी राहत देते हुए कर्ज नियमों में अहम बदलावों का ऐलान किया है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSE) के लिए बिना गारंटी मिलने वाले ऋण की सीमा को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख कर दिया गया है। यह नया प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।

आरबीआई के अनुसार, यह सुविधा उन सभी एमएसई ऋणों पर लागू होगी, जो तय तारीख के बाद स्वीकृत या नवीनीकृत किए जाएंगे। इस कदम का उद्देश्य छोटे कारोबारियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना, उद्यमिता को बढ़ावा देना और अंतिम छोर तक कर्ज की पहुंच को मजबूत करना है। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।

बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स के नियमों में बदलाव की तैयारी

गवर्नर ने कहा कि बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) देश के गांवों, दूरदराज और वंचित इलाकों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने की रीढ़ हैं। उनकी भूमिका को और प्रभावी बनाने के लिए नियमों की समीक्षा की जा रही है। इसके लिए आरबीआई, वित्तीय सेवाएं विभाग, भारतीय बैंक संघ और नाबार्ड के अधिकारियों की एक समिति बनाई गई थी।

समिति की सिफारिशों के आधार पर आरबीआई जल्द ही नए नियमों का मसौदा सार्वजनिक करेगा, जिस पर आम लोगों और हितधारकों से सुझाव मांगे जाएंगे। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) में भी बड़े सुधार

आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना की भी व्यापक समीक्षा की है। इसका उद्देश्य योजना का दायरा बढ़ाना, प्रक्रियाओं को आसान बनाना और मौजूदा जरूरतों के अनुरूप बदलाव करना है। प्रस्तावित सुधारों में फसल सीजन का मानकीकरण, केसीसी की अवधि को छह साल तक बढ़ाना और हर फसल सीजन के लिए स्केल ऑफ फाइनेंस के अनुसार ड्रॉइंग लिमिट तय करना शामिल है।

इसके अलावा तकनीकी हस्तक्षेप से जुड़े खर्चों को भी केसीसी ढांचे में शामिल करने का प्रस्ताव है। आरबीआई इन बदलावों से जुड़े मसौदा दिशा-निर्देश भी जल्द सार्वजनिक करेगा।

वित्तीय समावेशन को मिलेगा बढ़ावा

इन सभी फैसलों से एमएसई और कृषि क्षेत्र में कर्ज का प्रवाह बढ़ने, छोटे कारोबारियों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलने और ग्रामीण भारत में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच और मजबूत होने की उम्मीद है।