सावन में घर पर करने जा रहे हैं रुद्राभिषेक? भूलकर भी न करें ये गलतियां, जान लें ये जरूरी नियम और सही पूजा विधि
सावन (श्रावण) का पावन महीना शुरू होते ही हर तरफ शिव भक्ति की बहार आ गई है। इस पूरे महीने में महादेव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक करने का सबसे अधिक महत्व माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में घर पर रुद्राभिषेक करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, बीमारियां खत्म होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। लेकिन, घर पर रुद्राभिषेक करने के कुछ विशेष और कड़े नियम होते हैं, जिनका पालन करना हर शिव भक्त के लिए अनिवार्य है। अगर आप भी इस सावन अपने घर पर भोलेनाथ का अभिषेक करने जा रहे हैं, तो पूजा शुरू करने से पहले इन जरूरी बातों को नोट कर लें।
रुद्राभिषेक के लिए सबसे जरूरी नियम: 'शिववास' का ध्यान रखना है अनिवार्य
घर पर रुद्राभिषेक करने से पहले सबसे जरूरी काम ज्योतिषीय पंचांग के जरिए 'शिववास' (भगवान शिव का निवास स्थान) देखना होता है। शास्त्रों के अनुसार, जब भगवान शिव मां पार्वती के साथ होते हैं, कैलाश पर होते हैं या वृषारूढ़ (नंदी पर सवार) होते हैं, तभी रुद्राभिषेक करना सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। यदि महादेव श्मशान में हों या किसी क्रोधित मुद्रा में हों, तो उस समय घर पर अभिषेक करने से बचना चाहिए। हालांकि, सावन के सोमवार, शिवरात्रि, प्रदोष व्रत और ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समय शिववास देखने की आवश्यकता नहीं होती, इन दिनों में कभी भी अभिषेक किया जा सकता है।
अलग-अलग द्रव्यों से मिलता है अलग फल, नोट करें सामग्री
रुद्राभिषेक केवल जल से ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार के पवित्र द्रव्यों से किया जाता है और हर एक द्रव्य का अपना एक विशेष महत्व होता है:
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गाय का कच्चा दूध और गंगाजल: घर में सुख-शांति, मोक्ष प्राप्ति और लंबी आयु के लिए।
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गन्ने का रस: आर्थिक तंगी दूर करने और धन-धान्य की प्राप्ति के लिए।
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शहद और घी: कर्ज से मुक्ति पाने और समाज में मान-सम्मान बढ़ाने के लिए।
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सरसों का तेल: केवल विशेष परिस्थितियों में, शत्रुओं पर विजय पाने और ग्रहों के दोष दूर करने के लिए।
स्टेप-बाय-स्टेप समझें घर पर रुद्राभिषेक की सही पूजा विधि
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तैयारी और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो धोती या बिना सिला कपड़ा) धारण करें। उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। सबसे पहले हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर रुद्राभिषेक का संकल्प लें।
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प्रथम पूज्य की आराधना: अभिषेक की शुरुआत हमेशा भगवान गणेश, माता पार्वती, नौ ग्रहों और नंदी जी की पूजा से करें। गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करें।
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महादेव का आह्वान और मंत्र जाप: इसके बाद श्रृंगी (अभिषेक के पात्र) में जल या दूध भरकर शिवलिंग पर धीरे-धीरे अर्पित करें। इस दौरान निरंतर 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें। यदि योग्य पंडित जी मौजूद हैं, तो वे नमक चमक पाठ या रुद्र सूक्त के मंत्रों का पाठ करेंगे।
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श्रृंगार और महाआरती: अभिषेक संपन्न होने के बाद शिवलिंग को साफ कपड़े से पोंछें। फिर चंदन, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और भस्म से शिव जी का सुंदर श्रृंगार करें। अंत में धूप-दीप जलाकर कर्पूर से भोलेनाथ की महाआरती करें और प्रसाद वितरण करें।