मूर्ति नहीं, यहां होती है शिव जी के अंगूठे की पूजा! एक अंगूठे पर टिका है पूरा पर्वत, उमड़ती है भारी भीड़
भारत में भगवान शिव के अनगिनत मंदिर और उनके ऐसे कई चमत्कारी स्थान हैं, जो अपनी अनोखी मान्यताओं और रहस्यों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। आपने देश के कोने-कोने में भोलेनाथ के शिवलिंग, विशाल मूर्तियों और उनके विभिन्न स्वरूपों के दर्शन किए होंगे, लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जहां किसी मूर्ति या पूर्ण शिवलिंग की नहीं, बल्कि केवल भगवान शिव के अंगूठे की पूजा की जाती है? हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित यह पौराणिक स्थल अपनी इसी अनूठी विशेषता और अद्भुत रहस्यों के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।
अचलेश्वर महादेव मंदिर: जहां होती है शिवजी के अंगूठे की पूजा
हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत शहर धर्मशाला के पास स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर (Achलेश्वर Mahadev Temple) एक ऐसा पवित्र तीर्थ स्थल है, जहां भगवान शिव के दाहिने पैर के अंगूठे की पूजा की जाती है। इस मंदिर की सबसे बड़ी और हैरान करने वाली विशेषता यह है कि यहां स्थापित अंगूठे के आकार की प्राकृतिक चट्टान (स्वयंभू अंगूठा) पर ही पूरा एक विशाल पर्वत टिका हुआ है। सदियों से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है, जहां विज्ञान और प्रकृति का एक अनोखा संगम देखने को मिलता है।
क्या है इस अनोखे मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा?
हिंदू पौराणिक मान्यताओं और महाभारत काल से जुड़े इतिहास के अनुसार, एक समय यहां पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान रुके थे। मान्यता है कि पाण्डवों के प्रवास के दौरान भगवान शिव ने यहां प्राकृतिक रूप से अपने अंगूठे के रूप में प्रकट होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। एक अन्य लोककथा के अनुसार, इस स्थान पर पहाड़ियों की बनावट और भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह पूरा पहाड़ केवल एक बिंदु यानी शिवजी के अंगूठे रूपी आधार पर संतुलित है, जिसे हिला पाना या विस्थापित करना असंभव माना जाता है।
मौसम के साथ बदलता है अंगूठे का रंग
इस मंदिर को लेकर भक्तों के बीच एक और बहुत बड़ा आश्चर्य जुड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों और पुजारियों का कहना है कि इस प्राकृतिक अंगूठे का रंग मौसम के बदलाव के साथ बदलता रहता है। गर्मियों के दिनों में यह अलग रंग का दिखाई देता है, तो वहीं बरसात और सर्दियों के मौसम में इसके रंग में परिवर्तन साफ महसूस किया जा सकता है। इस रहस्य को देखने और अचलेश्वर महादेव का आशीर्वाद पाने के लिए सालभर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है, विशेषकर सावन के महीने और महाशिवरात्रि पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है।