मंगला गौरी व्रत आज, भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना अधूरा रह सकता है व्रत का फल

मंगला गौरी व्रत आज, भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना अधूरा रह सकता है व्रत का फल

हिन्दू धर्म में सावन मास के मंगलवार के दिन माता पार्वती को समर्पित मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा के दौरान कुछ खास नियमों का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। यदि आप भी यह व्रत रख रही हैं, तो इन 5 बड़ी गलतियों को करने से बचें, अन्यथा व्रत का पूर्ण फल मिलने में बाधा आ सकती है:

1. काले या नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचें

मंगला गौरी व्रत या किसी भी अन्य धार्मिक अनुष्ठान के दौरान माता पार्वती और शिव जी की पूजा करते समय काले या नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। पूजा के समय लाल, पीले, गुलाबी या हरे रंग के वस्त्र पहनना बेहद शुभ और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

2. तामसिक भोजन और वर्जित चीजों का सेवन

यदि आपने मंगला गौरी का व्रत रखा है, तो खान-पान के नियमों का विशेष ध्यान रखें। इस दिन भूलकर भी लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन न करें। इसके अलावा, व्रत के दौरान साधारण नमक (सफेद नमक) के बजाय सेंधा नमक का ही उपयोग करना चाहिए।

3. पूजा में सोलह श्रृंगार की अनदेखी

मंगला गौरी व्रत मुख्य रूप से सुहाग और सौभाग्य का पर्व है। इसलिए पूजा के दौरान माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं (चूड़ियां, महावर, सिंदूर, बिछिया आदि) अर्पित करना न भूलें। साथ ही, पूजा में माता को चढ़ाई जाने वाली सभी पूजन सामग्री और सुहाग की चीजें सोलह की संख्या में हों तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

4. क्रोध और वाद-विवाद से बनाएं दूरी

व्रत के दिन मन और आचरण दोनों को पवित्र रखना जरूरी है। इस पवित्र दिन किसी पर भी गुस्सा न करें, घर के बड़े-बुजुर्गों का अपमान न करें और किसी से भी वाद-विवाद या अपशब्द बोलने से बचें। मान्यता है कि व्रत के दिन क्लेश करने से पूजा का पूरा फल नहीं मिलता है।

5. व्रत कथा सुने बिना अधूरी न छोड़ें पूजा

मंगला गौरी व्रत में कथा सुनने का विशेष विधान है। केवल पूजा-पाठ कर लेने भर से व्रत पूरा नहीं माना जाता है। माता पार्वती की कृपा पाने के लिए व्रत की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। इसके साथ ही पूजा के अंत में 16 बत्तियों वाला घी का दीपक जलाकर आरती करना न भूलें।

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