सावन की पहली चतुर्थी: भगवान शिव और गणेश जी की इस विशेष विधि से करें पूजा, दूर होंगे सभी संकट
हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) के महीने को बेहद पवित्र और मनोकामनाएं पूरी करने वाला माना गया है। यह पूरा महीना देवों के देव महादेव को समर्पित होता है, लेकिन सावन में भगवान शिव के साथ उनके लाडले पुत्र और प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी की आराधना का भी अद्भुत संयोग बनता है। सावन के महीने में पड़ने वाली पहली चतुर्थी तिथि का आध्यात्मिक दृष्टि से बड़ा महत्व है। मान्यता है कि इस विशेष दिन शिव परिवार की संयुक्त पूजा करने से साधक के जीवन से सभी प्रकार के विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है। आइए जानते हैं सावन की पहली चतुर्थी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और फलदायी पूजा विधि।
सावन की पहली चतुर्थी की तिथि और महत्व
सावन महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) कहा जाता है, वहीं शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी (Vinayaka Chaturthi) के नाम से जाना जाता है। सावन की शुरुआत के साथ ही पड़ने वाली पहली चतुर्थी के दिन व्रत रखने और भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने से कुंडली के बुध और राहु दोषों से भी मुक्ति मिलती है। शिव पुराण के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान गणेश को सर्वप्रथम पूज्य होने का वरदान दिया था, इसलिए सावन में शिव जी की कृपा पाने के लिए गणेश जी को प्रसन्न करना अनिवार्य माना जाता है।
भगवान शिव और गणेश जी की संयुक्त पूजा विधि
इस पावन दिन पर सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपने घर के मंदिर में या शिवालय जाकर इस विधि से पूजा करें:
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संकल्प और ध्यान: हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत या विशेष पूजा का संकल्प लें। सबसे पहले भगवान गणेश और फिर माता पार्वती व भगवान शिव का ध्यान करें।
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गणेश जी का अभिषेक और दूर्वा अर्पण: भगवान गणेश की मूर्ति या प्रतिमा पर गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें। उन्हें लाल चंदन का तिलक लगाएं और उनकी सबसे प्रिय वस्तु दूर्वा (दूब घास) की 21 गांठें 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र बोलते हुए अर्पित करें। इसके बाद उन्हें मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
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महादेव की पूजा: इसके पश्चात भगवान शिव के शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करें। शिव जी को सफेद चंदन का त्रिपुंड लगाएं और 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें।
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आरती और क्षमा याचना: कपूर और शुद्ध घी के दीपक से पहले गणेश जी की और फिर भगवान शिव की आरती करें। पूजा के अंत में अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा याचना करें।
इन मंत्रों के जप से चमकेगी किस्मत
इस विशेष दिन पर पूजा के दौरान कुछ कल्याणकारी मंत्रों का जप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। गणेश जी की कृपा के लिए "वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥" का पाठ करें। वहीं भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षरी मंत्र का जप करें। इस विधि से की गई पूजा से घर की अशांति दूर होती है, आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलता है और रुके हुए मांगलिक कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न होते हैं।