धनतेरस से पहले मंदिर से हटा दें ये चीजें, एक गलती से हो जाएगा अशुभ

धनतेरस से पहले मंदिर से हटा दें ये चीजें, एक गलती से हो जाएगा अशुभ

सनातन धर्म में धनतेरस और दीपावली का त्योहार केवल धन-धान्य और समृद्धि का पर्व ही नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी के स्थायी वास का सबसे बड़ा अवसर भी माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले धनतेरस के पावन पर्व से ठीक पहले हर घर में साफ-सफाई और पूजा-पाठ की तैयारियां बड़े जोर-शोर से शुरू हो जाती हैं। हालांकि, वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, घर के सबसे पवित्र स्थान यानी 'पूजा घर' (मंदिर) में रखी कुछ अनजानी और खंडित चीजें आपके घर में दरिद्रता, वास्तु दोष और नकारात्मकता ला सकती हैं। अक्सर लोग अनजाने में पूजा घर में ऐसी वस्तुएं रखी रहने देते हैं जो शुभ कार्यों में विघ्न डालती हैं और मां लक्ष्मी व धन के देवता कुबेर को नाराज कर देती हैं। अगर आप भी इस धनतेरस पर मां लक्ष्मी की असीम कृपा और आरोग्य पाना चाहते हैं, तो शुभ मुहूर्त आने से पहले ही अपने घर के मंदिर का गहन निरीक्षण कर लें और वहां से उन अशुभ मानी जाने वाली चीजों को तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दें।

खंडित मूर्तियां और तस्वीरें: पूजा घर में इनका होना माना जाता है सबसे बड़ा वास्तु दोष

शास्त्रों में यह स्पष्ट रूप से विधान है कि पूजा घर में कभी भी कटी-फटी, टूटी हुई या खंडित मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि समय के साथ देवी-देवताओं की मिट्टी या प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का कोई हिस्सा थोड़ा सा टूट जाता है या फिर तस्वीरों का शीशा चटक जाता है। कई लोग श्रद्धा या मोहवश उन मूर्तियों को मंदिर में ही स्थापित रहने देते हैं। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि धनतेरस या दीपावली की पूजा से पहले ऐसी खंडित मूर्तियों को पूजा घर में रखना भारी दरिद्रता और गृह क्लेश को न्योता देना है। ऐसी मूर्तियों की पूजा करने से पूजा का शुभ फल मिलने के बजाय नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। इसलिए धनतेरस की सफाई करते समय इन खंडित मूर्तियों को पूरे आदर और सम्मान के साथ किसी पवित्र नदी या बहते जल में प्रवाहित कर दें अथवा किसी पीपल के वृक्ष के नीचे सम्मानपूर्वक रख दें।

एक ही देवी-देवता की एक से अधिक मूर्तियां और रौद्र रूप वाली तस्वीरें तुरंत हटाएं

घर के मंदिर की व्यवस्था बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वहां एक ही देवी-देवता की तीन या उससे ज्यादा मूर्तियां अथवा तस्वीरें एक साथ न रखी हों। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसा होने पर घर में ऊर्जा का संतुलन बिगड़ जाता है और परिवार के सदस्यों के बीच वैचारिक मतभेद बढ़ने लगते हैं। इसके अलावा, अपने पूजा घर में कभी भी देवी-देवताओं के रौद्र, क्रोधित या युद्धरत रूपों वाली तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए, जैसे कि महाकाली का भयंकर रूप या तांडव करते हुए भगवान शिव। धनतेरस और दिवाली जैसे पावन अवसरों पर मंदिर में केवल सौम्य, प्रसन्नचित्त, आशीर्वाद देती हुई और अभय मुद्रा वाली तस्वीरें या मूर्तियां ही स्थापित करनी चाहिए। विशेषकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की ऐसी प्रतिमा लाएं जिसमें मां लक्ष्मी कमल के फूल पर विराजमान हों और धन की वर्षा कर रही हों।

बासी फूल, सूखे हार और पूजा की पुरानी सामग्रियां बढ़ाती हैं दरिद्रता का प्रभाव

पूजा घर में प्रतिदिन अर्पित किए जाने वाले ताजे फूल और मालाएं जब सूख जाते हैं, तो उन्हें तुरंत वहां से हटा देना चाहिए। अक्सर लोग आलस या अज्ञानता के कारण सूखे हुए फूलों, बासी पत्तों और पुरानी पूजा सामग्री को मंदिर के कोनों में पड़ा रहने देते हैं। वास्तु के दृष्टिकोण से सूखा हुआ फूल और बासी सामग्री सीधे तौर पर 'राहु दोष' और नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है। सूखे हुए हार और फूलों में से निकलने वाली नकारात्मक तरंगे घर की आर्थिक स्थिति पर सीधा प्रहार करती हैं, जिससे बनते हुए काम भी बिगड़ने लगते हैं। इसलिए धनतेरस से पहले अपने पूजा घर की अलमारियों और दराजों को खाली करके पुराने सूत, जली हुई बत्तियों की राख, इस्तेमाल हो चुकी माचिस की तीलियां और धूपबत्ती का अवशेष पूरी तरह से साफ कर दें।

मंदिर में फटे हुए धार्मिक ग्रंथ और बंद पड़ी घड़ियां लाती हैं दुर्भाग्य का साया

घर का मंदिर आध्यात्मिक ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है। कई बार हम अपने पूजा घर में धार्मिक पुस्तकें, रामायण, भगवद गीता या हनुमान चालीसा रखते हैं, जो लगातार इस्तेमाल के कारण फट जाती हैं या उनके पन्ने बिखरे होते हैं। फटे-पुराने धार्मिक ग्रंथों को पूजा घर में रखना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इससे 'गुरु ग्रह' कमजोर होता है और व्यक्ति की बुद्धि व निर्णय लेने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। ऐसी पुस्तकों को या तो सम्मानपूर्वक किसी पवित्र जल में प्रवाहित कर दें या उन्हें नए सिरे से जिल्द (Binding) कराकर ही रखें। इसी तरह, यदि आपके मंदिर के आसपास या पूजा घर में कोई बंद पड़ी घड़ी रखी है, तो उसे तुरंत हटा दें या चालू करवाएं, क्योंकि बंद घड़ी प्रगति के चक्र को रोक देती है।

शंख, घंटी और तांबे के बर्तनों की सफाई तथा सही दिशा का रखें खास ध्यान

धनतेरस पर मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए केवल फालतू चीजें हटाना ही काफी नहीं है, बल्कि मंदिर में रखे शंख, पीतल और तांबे के बर्तनों की चमक भी लौटानी जरूरी होती है। तांबे के पात्रों में लगा कालापन या शंख में जमी धूल नकारात्मकता का प्रतीक होती है। इन सभी बर्तनों को गंगाजल और नींबू-पीतांबरी से धोकर पूरी तरह से स्वच्छ करें। इसके अलावा, इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपके घर का मंदिर हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में ही स्थित हो। पूजा घर में कभी भी पूर्वजों या पितरों की तस्वीरें न लगाएं, क्योंकि पितरों का स्थान पूजनीय जरूर होता है लेकिन उन्हें देवताओं के समकक्ष मंदिर के भीतर रखना शास्त्रानुकूल नहीं माना जाता। इन छोटी-छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखकर अगर आप इस धनतेरस पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करेंगे, तो आपके घर में सालभर सुख, समृद्धि और अटूट धन-धान्य का वास रहेगा।