Solar Eclipse 2026: सूर्य ग्रहण के दौरान भगवान की मूर्ति को छूने की क्यों होती है सख्त मनाही? जानिए इसके पीछे के धार्मिक और वैज्ञानिक रहस्य

Solar Eclipse 2026: सूर्य ग्रहण के दौरान भगवान की मूर्ति को छूने की क्यों होती है सख्त मनाही? जानिए इसके पीछे के धार्मिक और वैज्ञानिक रहस्य

सनातन धर्म में सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) और चंद्र ग्रहण को एक खगोलीय घटना के साथ-साथ धार्मिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना गया है। ग्रहण के दौरान कई तरह के नियमों का पालन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इनमें से एक सबसे मुख्य नियम यह है कि ग्रहण और सूतक काल के दौरान भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता और मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। आखिर ऐसा क्यों किया जाता है और इसके पीछे कौन-सा रहस्य छुपा है, आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

सूतक काल और ग्रहण के दौरान क्यों बदल जाती है ऊर्जा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण लगने से कुछ घंटे पहले ही 'सूतक काल' शुरू हो जाता है। इस अवधि को अशुभ और नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रभाव वाला माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जब राहु और केतु ग्रहों के प्रभाव से सूर्य या चंद्रमा पीड़ित होते हैं, तो वातावरण में अशुद्धि और नकारात्मक तरंगें फैल जाती हैं। यही कारण है कि इस संवेदनशील काल में किसी भी प्रकार के पवित्र कार्यों, पूजा-पाठ और भगवान की मूर्तियों को सीधे छूने से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

भगवान की मूर्तियों को स्पर्श न करने की धार्मिक वजह

हमारे घरों और मंदिरों में स्थापित मूर्तियां सामान्य पत्थर या धातु की नहीं होतीं, बल्कि 'प्राण-प्रतिष्ठा' के बाद उन्हें जीवित ऊर्जा का स्वरूप माना जाता है। सनातन परंपरा के अनुसार, ग्रहण के समय ब्रह्मांडीय ऊर्जा में असंतुलन पैदा होता है, जिसका प्रभाव मूर्तियों और पूजा स्थलों पर भी पड़ता है। मूर्तियों की पवित्रता और उनकी ऊर्जा को बनाए रखने के लिए ही सूतक और ग्रहण के दौरान उन्हें कपड़े से ढंक दिया जाता है या मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं ताकि बाहरी नकारात्मक प्रभाव उन तक न पहुंच सके।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से क्या है इसके पीछे का कारण?

केवल धार्मिक मान्यताएं ही नहीं, बल्कि इस परंपरा के पीछे वैज्ञानिक तर्क भी जुड़े हुए हैं। सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी (Ultraviolet) किरणें और हानिकारक रेडिएशन हमारे पर्यावरण और मानसिक स्थिति पर असर डालते हैं। प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों ने इन खगोलीय बदलावों को ध्यान में रखते हुए ऐसे नियम बनाए थे, ताकि लोग उस समय खुले में न आएं और नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहें। मूर्तियों को न छूना और घरों में शांत रहना भी इसी अनुशासन का एक हिस्सा है।

ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करें?

जैसे ही सूर्य ग्रहण समाप्त होता है, उसके बाद पूरे घर और मंदिर की शुद्धि की जाती है। ग्रहण काल के बाद लोग स्नान करते हैं, पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करते हैं और मूर्तियों को स्नान कराकर उनकी दोबारा पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा करने से वातावरण की अशुद्धि दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार फिर से शुरू हो जाता है।

Latest Posts