सावन के पहले दिन चमकेगी इन राशियों की किस्मत! दुर्लभ संयोगों के बीच शिव पूजन-जलाभिषेक का महामुहूर्त और सटीक विधि जानें
सनातन धर्म में सबसे पवित्र और देवों के देव महादेव की भक्ति के महापर्व 'सावन' के पावन महीने की शुरुआत होने जा रही है। शिव भक्तों के लिए यह पूरा महीना किसी उत्सव से कम नहीं होता, जब चारों तरफ 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' की गूंज सुनाई देती है। धार्मिक विद्वानों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार सावन का पहला दिन बेहद खास और अद्भुत होने वाला है क्योंकि इस दिन ग्रहों और नक्षत्रों की चाल से कई ऐसे दुर्लभ और महाशुभ योग बन रहे हैं, जो दशकों बाद देखने को मिलते हैं। इस पावन अवसर पर यदि विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन किया जाए, तो भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
सावन के पहले दिन बन रहे ये अद्भुत और शुभ योग
इस साल सावन के पहले दिन की शुरुआत बेहद कल्याणकारी संयोगों के साथ हो रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और प्रीति योग का एक साथ निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि में विराजमान रहेंगे, जिससे शिव आराधना का फल अनंत गुना बढ़ जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को किसी भी नए काम की शुरुआत और पूजा-पाठ के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस महासंयोग में की गई शिव पूजा से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि कुंडली में मौजूद राहु-केतु और शनि के अशुभ प्रभाव भी पूरी तरह शांत हो जाते हैं।
जलाभिषेक और शिव पूजन का सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त
भोलेनाथ की पूजा वैसे तो पूरे दिन की जा सकती है क्योंकि वे बहुत भोले हैं और सच्चे मन से की गई पुकार तुरंत सुन लेते हैं, लेकिन शास्त्रों में शुभ मुहूर्त में किए गए जलाभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है। सावन के पहले दिन पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त निम्नलिखित हैं:
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ब्रह्म मुहूर्त शिव पूजा: सुबह-सुबह सूर्योदय से पहले का समय मंत्र साधना और जलाभिषेक के लिए सर्वोत्तम है।
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर के समय का यह मुहूर्त बेहद शक्तिशाली माना जाता है, जिसमें की गई पूजा सीधे महादेव तक पहुंचती है।
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प्रदोष काल (संध्या समय): शाम के समय सूर्यास्त के बाद का डेढ़ घंटा शिव पूजा के लिए महामुहूर्त माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस समय महादेव माता पार्वती के साथ ब्रह्मांड में विचरण करते हैं।
जानिए महादेव को प्रसन्न करने की सबसे सरल और सटीक विधि
अगर आप भी सावन के पहले दिन घर पर या मंदिर में पूजा करने जा रहे हैं, तो शास्त्रों में बताई गई इस प्रामाणिक विधि का पालन जरूर करें:
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शुद्धि और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो सफेद या हरे रंग के) धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर सावन मास के व्रत या पूजा का संकल्प लें।
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जलाभिषेक का सही क्रम: सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल मिश्रित शुद्ध जल चढ़ाएं। इसके बाद पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से शिवलिंग को स्नान कराएं। अंत में एक बार फिर साफ जल या गंगाजल अर्पित करें।
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प्रिय वस्तुएं अर्पित करें: महादेव को अत्यंत प्रिय चीजें जैसे— बेलपत्र (कम से कम 3 या 5, जो कटे-फटे न हों), शमी के पत्ते, धतूरा, भांग, सफेद चंदन, अक्षत (साबुत चावल) और भस्म अर्पित करें। ध्यान रहे कि शिवजी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्ते, केतकी का फूल और सिंदूर/हल्दी का प्रयोग भूलकर भी न करें।
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भोग और आरती: शिव जी को मौसमी फल और सफेद मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करने के बाद अंत में कपूर से आरती पूरी करें।
कांवड़ यात्रा और शिवालयों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सावन की शुरुआत के साथ ही हरिद्वार, गौमुख, सुल्तानगंज और काशी विश्वनाथ समेत देश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर कांवड़ियों का हुजूम उमड़ना शुरू हो गया है। पवित्र गंगाजल लेकर अपने आराध्य का अभिषेक करने के लिए लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा शुरू कर चुके हैं। भीड़ और आस्था के इस महासैलाब को देखते हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। कांवड़ मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि शिव भक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और यह पावन महीना शांति व भक्ति के माहौल में संपन्न हो सके।