शुरू होने वाला है कार्तिक मास, दिवाली से पहले मां लक्ष्मी की असीम कृपा पाना है तो अभी से जान लें ये बेहद जरूरी बातें!

शुरू होने वाला है कार्तिक मास, दिवाली से पहले मां लक्ष्मी की असीम कृपा पाना है तो अभी से जान लें ये बेहद जरूरी बातें!

सनातन धर्म और हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को सभी महीनों में सबसे अधिक पवित्र, ऊर्जावान और मोक्षदायिनी माना गया है। चातुर्मास के अंतिम महीनों में आने वाला यह पावन महीना भगवान विष्णु की योगनिद्रा से जागने और माता लक्ष्मी के धरातल पर पूजन के विशेष उत्सवों से जुड़ा हुआ है। कुछ ही दिनों में शुरू होने वाले कार्तिक मास का आरंभ होते ही देश भर के मंदिरों और घरों में आध्यात्मिक उल्लास का माहौल छा जाता है। दिवाली का पावन पर्व इसी महीने की मुख्य शोभा है, जिसके स्वागत के लिए लोग हफ्तों पहले से तैयारियों में जुट जाते हैं। यदि आप भी इस दिवाली से पहले मां लक्ष्मी को अपने घर में आमंत्रित करना चाहते हैं और उनकी स्थाई कृपा पाना चाहते हैं, तो कार्तिक मास के शुरू होने से पहले ही आपको कुछ जरूरी नियमों, धार्मिक परंपराओं और वास्तु उपायों के बारे में पूरी जानकारी अवश्य होनी चाहिए, ताकि आपके घर में साल भर धन-धान्य की कोई कमी न रहे।

कार्तिक मास का धार्मिक महत्व और मां लक्ष्मी की आराधना का विधान

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास भगवान विष्णु के प्रिय महीनों में से एक है और इसे 'मासों में उत्तम मास' की संज्ञा दी गई है। इस पूरे महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने, तुलसी पूजन करने और दीपदान करने का अनंत गुना फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि कार्तिक मास में ही माता लक्ष्मी क्षीरसागर से प्रकट हुई थीं और भगवान विष्णु के साथ उनका शालिग्राम विवाह संपन्न हुआ था। यही कारण है कि इस महीने में देवी लक्ष्मी की पूजा करने से मनुष्य के पिछले जन्म के पाप भी नष्ट हो जाते हैं और उसकी आर्थिक तंगी हमेशा के लिए दूर हो जाती है। कार्तिक मास के दौरान सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना और उगते सूर्य को अर्घ्य देना शारीरिक और मानसिक शुद्धि के साथ-साथ सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

दिवाली से पहले घर की साफ-सफाई और नकारात्मकता को दूर करने के उपाय

कार्तिक मास के शुरू होते ही सबसे पहला और महत्वपूर्ण कार्य घर की पूर्ण साफ-सफाई से जुड़ा होता है। मां लक्ष्मी का वास हमेशा उसी घर में होता है जहां स्वच्छता, पवित्रता और सकारात्मकता का वास होता है। दिवाली से पहले और कार्तिक मास के इन दिनों में अपने घर के कोने-कोने की डीप क्लीनिंग करें। घर में पड़े कबाड़, टूटे-फूटे बर्तन, बंद पड़ी घड़ियां या बेकार सामान को तुरंत बाहर कर दें, क्योंकि वास्तु शास्त्र के अनुसार ये चीजें घर में दरिद्रता और आर्थिक रुकावटों का कारण बनती हैं। मुख्य द्वार की विशेष रूप से सफाई करें और उसे हल्दी, कुमकुम या फूलों से सजाने की तैयारी रखें। मुख्य द्वार पर रोजाना शाम को एक दीपक जलाना शुरू कर दें, ताकि माता लक्ष्मी आपके घर का रास्ता आसानी से ढूंढ सकें और आपके यहाँ स्थायी रूप सेिवास कर सकें।

उत्तर प्रदेश और देश भर के धार्मिक केंद्रों में कार्तिक स्नान व दीपदान की धूम

उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक शहरों जैसे वाराणसी (काशी), अयोध्या, प्रयागराज (इलाहाबाद), मथुरा और मिर्जापुर में कार्तिक मास का विशेष ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है। कार्तिक मास शुरू होते ही उत्तर प्रदेश की पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना और सरयू के घाटों पर लाखों श्रद्धालु कल्पवास और कार्तिक स्नान के लिए जुटने लगते हैं। घाटों पर सुबह और शाम को जलाए जाने वाले दीपकों की रोशनी से पूरा प्रदेश जगमगा उठता है। लखनऊ, कानपुर और मेरठ जैसे महानगरों के बाजारों में भी कार्तिक मास के आते ही रौनक बढ़ जाती है और लोग त्योहारों की खरीदारी शुरू कर देते हैं। स्थानीय परंपराओं के अनुसार इस महीने में घरों के बाहर आकाश दीप जलाने और तुलसी के चौरे के पास दीपदान करने की परंपरा का विशेष रूप से पालन किया जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

इन आदतों को अपनाकर कार्तिक मास में करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न

यदि आप सचमुच चाहते हैं कि इस दिवाली आपके घर में दरिद्रता का साया तक न भटके और मां लक्ष्मी की कृपा से वैभव की प्राप्ति हो, तो कार्तिक मास के इन पवित्र दिनों में अपनी जीवनशैली में कुछ सात्विक बदलाव जरूर करें। इस पूरे महीने मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का पूर्ण रूप से त्याग कर देना चाहिए और सात्विक आहार अपनाना चाहिए। इसके साथ ही गरीबों, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देना चाहिए। तुलसी के पौधे की नियमित सेवा करें और रोज शाम को घी का दीपक जलाएं। अपने बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान करें, क्योंकि जिस घर में नारी का अपमान होता है, वहां कभी भी लक्ष्मी का वास नहीं टिकता। इन छोटे-छोटे मगर बेहद प्रभावी नियमों का पालन करके आप न केवल कार्तिक मास के पवित्र फल को प्राप्त करेंगे, बल्कि इस दिवाली अपने जीवन में सुख, शांति और अपार ऐश्वर्य का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएंगे।