आज संकट नाशक चतुर्थी पर करें भगवान गणेश के 'अनिरुद्ध' रूप की पूजा; विघ्न होंगे दूर, रुके हुए सारे काम होंगे पूरे!

आज संकट नाशक चतुर्थी पर करें भगवान गणेश के 'अनिरुद्ध' रूप की पूजा; विघ्न होंगे दूर, रुके हुए सारे काम होंगे पूरे!

आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। सनातन परंपरा में इस दिन को भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना गया है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को 'वरद विनायक चतुर्थी' भी कहा जाता है। मान्यता है कि आज के दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश के विशेष स्वरूप 'अनिरुद्ध' (Lord Aniruddha) की पूजा-अर्चना करने से साधक के जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं पल भर में दूर हो जाती हैं और सालों से अटके हुए कार्य भी तेजी से पूरे होने लगते हैं।

आइए जानते हैं कि आज भगवान गणेश के अनिरुद्ध रूप की पूजा का क्या महत्व है, शुभ मुहूर्त क्या है और किस विशेष विधि से बप्पा को प्रसन्न किया जा सकता है।

क्या है भगवान गणेश के 'अनिरुद्ध' स्वरूप का महत्व?

संस्कृत में 'अनिरुद्ध' का अर्थ होता है—'जिसे कोई रोक न सके' या 'अजेय'। भगवान गणेश का यह स्वरूप अत्यंत तेजस्वी, निर्भीक और समस्त बाधाओं को तुरंत परास्त करने वाला माना गया है।

  • बाधाओं का नाश: यदि आपके व्यापार, नौकरी, विवाह या करियर में लगातार विघ्न आ रहे हैं, तो आज अनिरुद्ध रूप का ध्यान करने से भाग्य के बंद द्वार खुल जाते हैं।

  • शत्रुओं पर विजय: इस स्वरूप की आराधना से नकारात्मक ऊर्जा, कोर्ट-कचहरी के मामले और ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं के भय से मुक्ति मिलती है।

  • बौद्धिक विकास: छात्र और युवा यदि आज के दिन बप्पा के इस स्वरूप का पूजन करते हैं, तो उनकी एकाग्रता बढ़ती है और करियर में नए अवसरों की प्राप्ति होती है।

आज पूजा का शुभ मुहूर्त (17 जुलाई 2026)

शास्त्रों के अनुसार, विनायक चतुर्थी की पूजा हमेशा दोपहर के समय (मध्याह्न काल) करना सबसे उत्तम फलदायी माना जाता है। आज पूजा के विशेष मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • मध्याह्न पूजा का शुभ समय: दोपहर 11 बजकर 01 मिनट से दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक। (इस ढाई घंटे की अवधि में बप्पा की पूजा करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा)।

  • राहुकाल (वर्जित समय): सुबह 10 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। ध्यान रखें कि इस अशुभ समय में पूजा की शुरुआत करने से बचें।

कैसे करें भगवान गणेश के अनिरुद्ध स्वरूप की विशेष पूजा?

आज के दिन बप्पा की कृपा पाने के लिए इस सरल लेकिन अचूक पूजा विधि का पालन करें:

  1. गंगाजल से अभिषेक: सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में बप्पा की मूर्ति को गंगाजल या पंचामृत से स्नान कराएं।

  2. पीला चंदन और सिंदूर: भगवान गणेश को पीले चंदन का तिलक लगाएं और लाल सिंदूर अर्पित करें। विघ्नहर्ता को सिंदूर अत्यंत प्रिय है।

  3. दुर्वा और लाल फूल: बप्पा के 'अनिरुद्ध' स्वरूप को 21 हरी दूर्वा (दूब घास) की गाठें और लाल रंग के गुड़हल या गुलाब के फूल चढ़ाएं।

  4. मोदक या लड्डू का भोग: भगवान गणेश को बेसन के लड्डू या मोदक का भोग लगाएं। इसके साथ ही एक नारियल और ऋतुफल भी अर्पित करें।

  5. धूप-दीप और मंत्र जाप: घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश के संकट नाशक स्तोत्र का पाठ करें या नीचे दिए गए विशेष मंत्र का 108 बार जाप करें।

आज जाप करने का विशेष मंत्र: "ॐ अनिरुद्धाय नमः" अथवा "ॐ गं गणपतये नमः"

पूजा के अंत में बप्पा की आरती करें और उनसे अपने जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें। अंत में सभी में प्रसाद बांट दें।

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