अगस्त में पड़ेंगी 2 बड़ी तीज, जानें कब है हरियाली तीज और कजरी तीज, किसमें रखा जाता है निर्जला व्रत?

अगस्त में पड़ेंगी 2 बड़ी तीज, जानें कब है हरियाली तीज और कजरी तीज, किसमें रखा जाता है निर्जला व्रत?

अगस्त का महीना व्रत और त्योहारों के लिहाज से बेहद खास माना जाता है। इस महीने में सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण और बड़े त्योहारों में शुमार हरियाली तीज और कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन और भाद्रपद मास में आने वाले इन दोनों ही पर्वों का अपना एक अलग धार्मिक महत्व है। महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी पारिवारिक जीवन के लिए इन व्रतों को पूरे विधि-विधान के साथ रखती हैं। आइए जानते हैं इस साल अगस्त के महीने में पड़ने वाली इन दोनों बड़ी तीज की सही तिथियां और किस पर्व में रखा जाता है निर्जला व्रत।

हरियाली तीज 2026: कब है और क्यों है खास

सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन को छोटी तीज भी कहा जाता है। इस पावन अवसर पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। यह पर्व प्रकृति के श्रृंगार और हरियाली का प्रतीक माना जाता है, जिसमें चारों तरफ हर तरफ हरियाली और उल्लास का माहौल रहता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और निर्जला व्रत रखकर अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं।

कजरी तीज 2026: भाद्रपद मास की बड़ी तीज

हरियाली तीज के कुछ दिनों बाद भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनाई जाती है, जिसे सातूड़ी तीज या कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व का उत्तर भारत में विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं माता नीमड़ी और भगवान शिव की पूजा करती हैं। कजरी तीज के मौके पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष विधान है और कई जगहों पर इस व्रत में भी अन्न और जल का त्याग किया जाता है। ग्रामीण संस्कृति में इस दिन लोक गीत और कजरी गाने की बेहद पुरानी परंपरा है।

हरियाली तीज और कजरी तीज में क्या है व्रत का नियम

व्रत के नियमों की बात करें तो हरियाली तीज और कजरी तीज दोनों ही व्रतों में कठिन नियमों का पालन किया जाता है। हरियाली तीज का व्रत पूरी तरह से निर्जला रखा जाता है, जिसमें सुहागिन महिलाएं पूरा दिन और पूरी रात बिना पानी के उपवास रखती हैं। वहीं, कजरी तीज के व्रत में भी जल और अन्न ग्रहण करने के कड़े नियम होते हैं, जिसमें कई जगहों पर महिलाएं चांद देखने या चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण करती हैं। इन दोनों ही पर्वों पर माता पार्वती और शिव जी की कृपा पाने के लिए व्रत के दौरान सात्विकता और नियमों का खास ख्याल रखा जाता है।

 

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