सावन सोमवार व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं? जानिए नियम, पूजा विधि, विशेष भोग और आरती की पूरी जानकारी

सावन सोमवार व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं? जानिए नियम, पूजा विधि, विशेष भोग और आरती की पूरी जानकारी

श्रावण मास के पवित्र सोमवार का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए खान-पान और नियमों का सही पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। व्रत के दौरान अनजाने में की गई छोटी सी भूल भी पूजा के फल को कम कर सकती है। यदि आप भी सावन सोमवार का व्रत रख रहे हैं, तो शरीर में ऊर्जा बनाए रखने और मानसिक पवित्रता के लिए शास्त्रों के अनुसार क्या खाना चाहिए और किन चीजों से सख्त परहेज करना चाहिए, इसकी पूरी गाइड नीचे दी गई है।

सावन सोमवार व्रत में क्या खाएं (Fasting Diet):

  • फल और जूस: व्रत के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए सेब, केला, अनार, नाशपाती और अंगूर जैसे ताजे फलों का सेवन करें। मौसमी फलों का जूस या नारियल पानी पीना भी बेहद फायदेमंद होता है।

  • फलाहार: कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की पूड़ी या हलवा, साबूदाने की खिचड़ी या वड़ा, और समा के चावल की खीर का सेवन फलाहार के रूप में किया जा सकता है।

  • डेयरी प्रोडक्ट्स: दूध, दही, छाछ, लस्सी, पनीर और घर का निकाला हुआ सफेद मक्खन व्रत में ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत हैं।

  • सेंधा नमक और मेवे: यदि आप एक समय नमक वाला फलाहार करते हैं, तो केवल सेंधा नमक (Rock Salt) का ही प्रयोग करें। इसके साथ ही बादाम, मखाने, काजू और मूंगफली को घी में भूनकर खा सकते हैं।

भूलकर भी न खाएं ये चीजें (Strictly Avoid):

  • अनाज और दालें: व्रत में गेहूं, चावल, बेसन, मैदा, सूजी, मक्का और किसी भी प्रकार की दालों का सेवन पूरी तरह वर्जित है।

  • लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन: सावन के महीने में सामान्य दिनों में भी लहसुन-प्याज मना होता है, व्रत में इसका सेवन महापाप माना गया है। इसके अलावा मांस, मदिरा और अंडे से पूरी तरह दूरी बनाएं।

  • साधारण नमक और मसाले: व्रत में साधारण समुद्री नमक का इस्तेमाल न करें। मसालों में हल्दी, हींग, राई, मेथी दाना और गरम मसाले का उपयोग फलाहार में नहीं किया जाता।

  • पैक्ड फूड और कैफीन: बाजार में मिलने वाले चिप्स, नमकीन या डिब्बाबंद जूस में साधारण नमक और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, इसलिए इनसे बचें। चाय या कॉफी का सेवन भी सीमित मात्रा में ही करें।

सुबह और शाम की सरल व सटीक पूजा विधि सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र (संभव हो तो सफेद या पीले) धारण करें। घर के मंदिर में दीप जलाएं और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पास के शिव मंदिर जाकर या घर पर ही शिवलिंग का गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें। शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं और महादेव की प्रिय वस्तुएं—बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र, भांग और अक्षत (बिना टूटे चावल) अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर शिव चालीसा का पाठ करें। यही प्रक्रिया शाम को प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में भी दोहराएं और आरती के बाद व्रत का पारण करें।

भोलेनाथ का पसंदीदा भोग और विशेष प्रसाद महादेव बहुत ही भोले हैं, वे केवल एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन सावन सोमवार को उन्हें कुछ विशेष चीजों का भोग लगाने से हर मनोकामना पूरी होती है:

  • कच्चा दूध और पेड़ा: गाय के कच्चे दूध और मावे के सफेद पेड़े का भोग लगाने से कुंडली का चंद्र दोष दूर होता है।

  • पंचामृत और खीर: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत और मखाने या साबूदाने की फलाहारी खीर महादेव को बेहद प्रिय है।

  • ऋतु फल: सावन के महीने में आने वाले मौसमी फल जैसे आम, केला और सेब का भोग अवश्य लगाएं।

शिव जी की आरती: ॐ जय शिव ओंकारा

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