नशेड़ी पति ने निर्वस्त्र कर सड़क पर फेंका; अब देश के लिए जीता ऐतिहासिक गोल्ड, शर्मीला धनकड़ की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

नशेड़ी पति ने निर्वस्त्र कर सड़क पर फेंका; अब देश के लिए जीता ऐतिहासिक गोल्ड, शर्मीला धनकड़ की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

ग्लासगो में खेले जा रहे राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games 2026) में भारत की बेटियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के शुरुआती 5 दिनों में भारत के 10 मेडल हो चुके हैं, लेकिन इनमें सबसे भावुक और ऐतिहासिक क्षण पैरा-एथलेटिक्स से आया।

भारत की 40 वर्षीय पैरा-एथलीट शर्मीला धनकड़ ने महिलाओं की शॉट पुट (गोला फेंक - F57 वर्ग) स्पर्धा में देश के लिए पहला पैरा-एथलेटिक्स गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। बर्मिंघम CWG और हांगझोउ पैरा एशियाई खेलों में चौथे स्थान पर रहने वाली शर्मीला का यह पहला बड़ा अंतर्राष्ट्रीय स्वर्ण पदक है, लेकिन इस सफलता के पीछे एक ऐसा कड़ा संघर्ष छिपा है जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं।

नशेड़ी पति की बर्बरता: बेटियों के साथ निर्वस्त्र कर सड़क पर फेंका गया था

शर्मीला धनकड़ का जीवन 14 साल पहले किसी नर्क से कम नहीं था। बचपन में महज 2 साल की उम्र में पोलियो के कारण उनका एक पैर प्रभावित हो गया था। इसके बावजूद वह पढ़ाई में अव्वल रहीं और 10वीं कक्षा तक हमेशा टॉपर रहीं।

हालांकि, कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण 19 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई। शर्मीला के अनुसार, उनका पहला पति नशे का आदी था और दूसरी बेटी के जन्म के बाद उस पर जुल्म ढाने लगा। साल 2012 में रेवाड़ी के गुरकावास गांव में उसके नशेड़ी पति ने शर्मीला को उनकी दो मासूम बेटियों के साथ बिना कपड़ों के सड़क पर फेंक दिया था। उस वक्त पड़ोसियों ने उन्हें कंबल में लपेटा और महेंद्रगढ़ के छिथरौली गांव से आए उनके माता-पिता (जय लाल और नेत्रहीन मां सरोज) उन्हें वापस घर ले गए।

दूसरे पति ने बदला जीवन: प्लंबर का काम छोड़कर शर्मीला के खेल के लिए झोंकी ताकत

पहले पति के अत्याचारों से उबरने के बाद 2018 में शर्मीला की जिंदगी में अजीत सिंह आए। शर्मीला से शादी के बाद अजीत ने उनकी किस्मत ही बदल दी। अजीत, जो पेशे से एक प्लम्बर और पंप टेक्नीशियन थे, उन्होंने शर्मीला के खेल के सपने को पूरा करने के लिए अपना काम तक छोड़ दिया। उन्होंने बेटियों की देखभाल की और शर्मीला को आगे बढ़ने के लिए हर संभव सहयोग दिया। शर्मीला ने 2018 में हरियाणा रोडवेज में 3 महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर महिला बस कंडक्टर का काम भी किया था।

शर्मीला कहती हैं, "जहां पहले पति ने जीवन को नर्क बना दिया था, वहीं अजीत ने सब कुछ दांव पर लगाकर मेरी जिंदगी को स्वर्ग बना दिया।"

पिता के निधन और तंगहाली के बावजूद नहीं माना हार, महिलाओं को दिया खास संदेश

ग्लासगो खेलों से महज एक साल पहले शर्मीला के पिता जय लाल का निधन हो गया था, जो उनके लिए एक बड़ा झटका था।

वर्तमान में रेवाड़ी में किराए के मकान में रह रहीं शर्मीला को उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक गोल्ड मेडल के बाद स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) और हरियाणा सरकार की मदद से वह अपना खुद का घर खरीद सकेंगी। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की प्रेस ब्रीफिंग में जनसत्ता के सवालों का जवाब देते हुए शर्मीला ने देश की महिलाओं के लिए एक मजबूत संदेश दिया। उन्होंने कहा, "मैं हर बेटी और महिला से कहना चाहती हूं कि हमें प्रताड़ना के सामने झुकना नहीं चाहिए, बल्कि उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।" शर्मीला अब अपनी बेटियों को भी खेल के क्षेत्र में आगे लाने के लिए तैयार कर रही हैं।

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