40 साल की उम्र में बल्ले से निकला 'बारूद'! ब्रैंडन टेलर ने 8 साल बाद ठोका ऐतिहासिक शतक, टूट गए वर्ल्ड रिकॉर्ड्स

40 साल की उम्र में बल्ले से निकला 'बारूद'! ब्रैंडन टेलर ने 8 साल बाद ठोका ऐतिहासिक शतक, टूट गए वर्ल्ड रिकॉर्ड्स

शारजाह क्रिकेट स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच में जिम्बाब्वे के दिग्गज और अनुभवी बल्लेबाज ब्रैंडन टेलर ने अपने बल्ले से ऐसा तूफान खड़ा किया कि टेस्ट क्रिकेट के कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। 5 नवंबर से शुरू हुई दो टेस्ट मैचों की इस सीरीज के पहले दिन जिम्बाब्वे ने बेहद मजबूत शुरुआत करते हुए 5 विकेट पर 326 रन का स्कोर खड़ा कर दिया। इस ठोस शुरुआत के सबसे बड़े नायक रहे ब्रैंडन टेलर, जिन्होंने 8 साल के लंबे सूखे को खत्म करते हुए एक यादगार शतकीय पारी खेली और इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया।

मुश्किल दौर से गुजर रही जिम्बाब्वे की पारी को एक छोर से संभालते हुए टेलर ने महज 168 गेंदों पर 131 रनों की विस्फोटक और आक्रामक पारी खेली, जिसमें 14 करारे चौके और 4 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। इस पारी के साथ ही ब्रैंडन टेलर टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में जिम्बाब्वे के लिए शतक लगाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए हैं। टेलर ने यह कारनामा 40 साल और 272 दिन की उम्र में अंजाम दिया। इसके साथ ही उन्होंने हमवतन क्रेग इरविन का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने साल 2024 में बुलावायो के मैदान पर अफगानिस्तान के खिलाफ ही 39 साल और 129 दिन की उम्र में टेस्ट शतक जमाया था।

अफगानिस्तान के खिलाफ आया यह शतक ब्रैंडन टेलर के टेस्ट करियर का 7वां शतक है। इसके साथ ही वह जिम्बाब्वे के लिए टेस्ट में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने ग्रांट फ्लावर और सीन विलियम्स के 6-6 शतकों के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है, जबकि 12 शतकों के साथ पूर्व महान विकेटकीपर-बल्लेबाज एंडी फ्लावर इस सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं।

विश्व क्रिकेट के कैनवास पर टेलर की यह पारी और भी ज्यादा खास है। साल 2000 यानी 21वीं सदी के बाद से टेस्ट क्रिकेट में 40 वर्ष या उससे अधिक की आयु में शतक जड़ने वाले टेलर दुनिया के महज तीसरे बल्लेबाज बन गए हैं। इस दौर में टेलर से पहले यह नायाब उपलब्धि सिर्फ पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मिस्बाह-उल-हक और वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज शिवनारायण चंद्रपॉल के नाम दर्ज थी। पहले दिन के खेल के बाद जिम्बाब्वे की मजबूत स्थिति ने अफगानिस्तान के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है।