IND A vs NZ A: देवदत्त पडिक्कल के साथ न्यूजीलैंड में अन्याय, सिर्फ 1 रन से चूके दोहरा शतक, अंपायर की गलती ने तोड़ा दिल
इंडिया ए और न्यूजीलैंड ए के बीच खेले जा रहे बहुचर्चित अनऑफिशियल टेस्ट मुकाबले में भारतीय युवा बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल की अद्भुत और ऐतिहासिक पारी का अंत एक बेहद ही विवादित और निराशाजनक तरीके से हुआ। शानदार लय में नजर आ रहे पडिक्कल जब 199 रन के स्कोर पर बल्लेबाजी कर रहे थे और अपने करियर के पहले विदेशी दोहरे शतक से महज एक रन दूर थे, तभी मैदानी अंपायर के एक बेहद विवादास्पद फैसले ने उनके सपने को चकनाचूर कर दिया। न्यूजीलैंड के गेंदबाज की लेग साइड से बाहर जाती गेंद पर अंपायर ने पडिक्कल को कैच बिहाइंड करार देकर आउट घोषित कर दिया, जबकि रीप्ले में स्पष्ट नजर आ रहा था कि गेंद का बल्ले या ग्लव्स से दूर-दूर तक कोई संपर्क नहीं हुआ था। इस गलत फैसले के बाद पडिक्कल का दिल टूट गया और वे बेहद निराश होकर पवेलियन लौटने को मजबूर हुए।
199 रन पर गलत आउट होने के बाद अंपायर पर भड़का फैंस का गुस्सा: क्यों उठी डीआरएस (DRS) की मांग?
देवदत्त पडिक्कल के इस तरह 199 रन पर अंपायर की चूक के कारण आउट होने के बाद सोशल मीडिया पर क्रिकेट फैंस और पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों का गुस्सा फूट पड़ा है। एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर फैंस इस फैसले की जमकर आलोचना कर रहे हैं और अंपायरिंग के गिरते स्तर पर सवाल उठा रहे हैं। चूंकि इंडिया ए और न्यूजीलैंड ए की इस सीरीज में निर्णय समीक्षा प्रणाली यानी डीआरएस (DRS) तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था, इसलिए पडिक्कल अंपायर के गलत फैसले को चुनौती भी नहीं दे सके। क्रिकेट प्रेमियों का कहना है कि ए-टीमों के इतने महत्वपूर्ण मैचों में तकनीक का इस्तेमाल न होना युवा खिलाड़ियों के करियर और उनकी मेहनत के साथ सीधा खिलवाड़ है, क्योंकि एक सही तकनीक पडिक्कल को उनका ऐतिहासिक दोहरा शतक दिला सकती थी।
विदेशी पिच पर पडिक्कल का क्लासिक क्लास: कठिन परिस्थितियों में खेली जुझारू और रिकॉर्डतोड़ पारी
अंपायर की इस बड़ी भूल को अगर किनारे रख दें, तो न्यूजीलैंड की तेज, उछालभरी और स्विंग होती पिचों पर देवदत्त पडिक्कल द्वारा खेली गई यह पारी भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बेहतरीन ए-टीम पारियों में से एक बन गई है। शुरुआत में जब भारतीय टीम ने जल्दी विकेट गंवा दिए थे, तब पडिक्कल ने एक छोर संभाले रखा और कीवी गेंदबाजों के धारदार आक्रमण का बड़ी ही बहादुरी से सामना किया। उन्होंने अपनी 199 रनों की मैराथन पारी में बेहतरीन कवर ड्राइव्स, पुल शॉट्स और शानदार फुटवर्क का प्रदर्शन किया। उनकी इस क्लासिक बल्लेबाजी ने न केवल इंडिया ए को एक बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचाया, बल्कि भारतीय सीनियर टीम के चयनकर्ताओं को भी यह कड़ा संदेश दिया कि वे राष्ट्रीय टीम में वापसी के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
सीनियर टीम में वापसी की दावेदारी हुई मजबूत: चयनकर्ताओं की नजरों में छाए देवदत्त पडिक्कल
भले ही किस्मत और अंपायर के फैसले ने पडिक्कल को दोहरा शतक बनाने से रोक दिया हो, लेकिन उनकी इस 199 रनों की जुझारू पारी ने उनका कद और ज्यादा बढ़ा दिया है। भारतीय क्रिकेट टीम के आगामी विदेशी दौरों और टेस्ट मैचों को देखते हुए पडिक्कल की यह पारी बहुत अहम मानी जा रही है। बाएं हाथ के इस प्रतिभाशाली बल्लेबाज ने साबित कर दिया है कि वे केवल घरेलू मैदानों पर ही नहीं बल्कि विदेशों की तेज और मुश्किल पिचों पर भी लंबी पारी खेलने का दम-खम रखते हैं। मैच खत्म होने के बाद ड्रेसिंग रूम में भारतीय खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने खड़े होकर पडिक्कल का जोरदार स्वागत किया, क्योंकि हर किसी की नजर में उनका यह 199 रन किसी दोहरे शतक से कम नहीं था।