जानें क्या है आकिब नबी की ताकत, बुमराह की जगह भारतीय टीम में हुए शामिल
भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले टीम इंडिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चोट से पूरी तरह फिट नहीं हो पाने के कारण जसप्रीत बुमराह इस सीरीज का हिस्सा नहीं होंगे। उनकी जगह जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को टीम में शामिल किया गया है।
आकिब नबी का चयन सिर्फ एक खिलाड़ी की जगह भरने तक सीमित नहीं है। यह जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर आकिब ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
रणजी ट्रॉफी में दिखाया दमदार प्रदर्शन
आकिब नबी ने जम्मू-कश्मीर को रणजी ट्रॉफी में ऐतिहासिक सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने 2025-26 सीजन में 10 मैचों में 60 विकेट हासिल किए और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने।
उनके हालिया प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। पिछले दो रणजी सीजन में आकिब ने कुल 18 मुकाबलों में 104 विकेट झटके हैं। 2024-25 सीजन में उन्होंने 8 मैचों में 44 विकेट लिए थे। इसके बाद अगले सीजन में उनका प्रदर्शन और बेहतर हुआ और उन्होंने 60 विकेट अपने नाम किए।
गति से ज्यादा सटीक गेंदबाजी है ताकत
आकिब नबी की सबसे बड़ी ताकत उनकी गेंद पर पकड़ और लगातार सही जगह गेंद डालने की क्षमता है। वह दाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं और उनकी गेंदबाजी की रफ्तार करीब 125 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच रहती है।
हालांकि उनकी गति सबसे तेज गेंदबाजों जैसी नहीं है लेकिन वह गेंद को दोनों दिशाओं में स्विंग कराने में माहिर हैं। उनका रनअप संतुलित है और गेंद रिलीज करने का तरीका काफी प्रभावी माना जाता है। टेस्ट क्रिकेट में लंबे स्पेल डालने की उनकी क्षमता उन्हें खास बनाती है।
गेंदबाजी एक्शन और नियंत्रण ने बनाया अलग
BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जुड़े रह चुके गेंदबाजी कोच पी कृष्णकुमार के अनुसार आकिब नबी का गेंदबाजी एक्शन काफी मजबूत है। उनका रिलीज पॉइंट लगभग हर गेंद पर एक जैसा रहता है जिससे उनकी लाइन और लेंथ में निरंतरता दिखाई देती है।
आकिब की खास बात यह है कि वह अपने एक्शन में बदलाव किए बिना इन-स्विंग और आउट-स्विंग दोनों तरह की गेंदें फेंक सकते हैं। यही वजह है कि रणजी ट्रॉफी के फाइनल में केएल राहुल और मयंक अग्रवाल जैसे अनुभवी बल्लेबाजों को भी उनके खिलाफ परेशानी का सामना करना पड़ा था।