पडिक्कल का तूफानी शतक: 7 साल पुराना पुजारा का रिकॉर्ड तोड़ा, कोहली की बराबरी कर रचा इतिहास

पडिक्कल का तूफानी शतक: 7 साल पुराना पुजारा का रिकॉर्ड तोड़ा, कोहली की बराबरी कर रचा इतिहास

कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब (SSC) मैदान पर भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले ही दिन भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने अपने बल्ले की धमक से इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

टीम इंडिया के कप्तान शुभमन गिल के टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने के फैसले को सही साबित करते हुए नंबर तीन पर उतरे पडिक्कल ने 117 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली। गॉल टेस्ट में लाजवाब शतक जमाने के बाद कोलंबो में भी लगातार दूसरा सैकड़ा जड़कर इस युवा बल्लेबाज ने श्रीलंका की धरती पर दिग्गज बल्लेबाजों के क्लब में सीधे एंट्री मार ली है।

विराट कोहली के रिकॉर्ड की बराबरी, दिग्गजों की खास सूची में शामिल

साई सुदर्शन के चोटिल होकर बाहर होने के बाद मिले मौके को पडिक्कल ने दोनों हाथों से भुनाया है। गॉल टेस्ट की दोनों पारियों में 200 से अधिक रन ठोकने वाले पडिक्कल ने कोलंबो में भी अपनी उसी लय को बरकरार रखा। इस शतकीय पारी की बदौलत वह श्रीलंका की सरजमीं पर भारत की ओर से सर्वाधिक टेस्ट शतक लगाने के मामले में पूर्व कप्तान विराट कोहली के बराबर पहुंच गए हैं:

  • सचिन तेंदुलकर: 5 टेस्ट शतक (श्रीलंका में शीर्ष पर)

  • वीरेंद्र सहवाग, शिखर धवन, चेतेश्वर पुजारा: 3-3 टेस्ट शतक

  • देवदत्त पडिक्कल, विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे, मोहम्मद अजहरुद्दीन, विनोद कांबली, नवजोत सिंह सिद्धू: 2-2 टेस्ट शतक

7 साल बाद विदेशी धरती पर दोहराया चेतेश्वर पुजारा का करिश्मा

भारतीय टेस्ट टीम लंबे समय से नंबर 3 के मजबूत और भरोसेमंद दावेदार की तलाश में थी। पडिक्कल ने इस पोजीशन पर अपनी दावेदारी को बेहद मजबूती से स्थापित कर दिया है। वह पिछले 7 वर्षों में पहले ऐसे भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं, जिसने विदेशी धरती पर खेली गई किसी टेस्ट सीरीज के लगातार दो मुकाबलों में नंबर 3 पर बैटिंग करते हुए शतक जड़े हैं। उनसे पहले यह कारनामा साल 2018-19 के ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर चेतेश्वर पुजारा ने किया था, जब उन्होंने मेलबर्न में 106 और सिडनी में 193 रनों की यादगार पारियां खेली थीं।

टीम इंडिया को नंबर 3 का नया भरोसेमंद योद्धा मिला

पडिक्कल की इस संयमित और आक्रामक पारी ने न केवल भारतीय पारी को शुरुआती झटकों के बाद मजबूती दी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वह विदेशी पिचों पर तकनीक और मानसिक दृढ़ता के मामले में पूरी तरह परिपक्व हो चुके हैं। उनकी यह पारी भारतीय टेस्ट टीम के मध्यक्रम को आने वाले लंबे दौरों के लिए नया संतुलन प्रदान कर रही है।

Latest Posts