Up kiran,Digital Desk : दिल्ली और उसके आस‑पास के इलाकों में प्रदूषण की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है और लोगों को सांस लेने में अभी भी मुश्किल हो रही है। राजधानी का Air Quality Index (AQI) लगातार ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज हो रहा है, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ रहा है।
वर्तमान हालात
आज सुबह दिल्ली‑एनसीआर के कई हिस्सों में AQI ‘बहुत खराब’ 300 से ऊपर दर्ज हुआ, जबकि ग़ुरुग्राम में भी हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ स्तर तक बढ़ी।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाज़ियाबाद जैसे आसपास के इलाकों में भी AQI ‘बहुत खराब’ या ‘गंभीर’ श्रेणी में रहा।
मौसम का ठंडा रुख — सर्दी और कोहरे — प्रदूषण कणों को फैलने नहीं देता, जिससे हवा और जहरीली बनी रहती है।
क्या AQI‑का स्तर दिखा रहा है?
AQI 301‑400 के बीच ‘बहुत खराब’ माना जाता है — जिसका मतलब है कि हवा में प्रदूषण इतनी मात्रा में है कि यह सभी उम्र के लोगों के लिए तकलीफ़दायक हो सकता है।
‘गंभीर’ (401‑500) स्तर पर तो यह स्वास्थ्य को और अधिक जोखिम में डाल देता है — जैसे श्वसन संबंधी समस्याएँ और घुटन महसूस होना।
क्या वजहें हैं हवा खराब होने की?
सर्दी के मौसम में हवा स्थिर रहती है और कोहरा उस हवा में धूल‑धुएँ को फंसा देता है।
वाहनों, इंडस्ट्रीज़ और आसपास के इलाकों (जैसे हरियाणा‑पंजाब) में स्टबल बर्निंग/पराली जलाना समेत कृषि गतिविधियाँ भी प्रदूषण में योगदान देती हैं।
पिछले वर्षों के आंकड़ों के हिसाब से दिल्ली का प्रदूषण का बड़ा हिस्सा शहर के बाहर से आने वाले स्रोतों से आता है, न कि सिर्फ़ भीतर से।
लोगों को क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
बुज़ुर्ग, बच्चे, सांस के मरीज और गर्भवती महिलाएँ सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं — इन्हें बाहर कम निकलना चाहिए।
सुबह‑शाम के समय घने कोहरे के कारण दृश्यता कमजोर हो सकती है — ड्राइविंग में विशेष सावधानी आवश्यक है।
मास्क पहनना और घर के वातावरण में शुद्धता बनाए रखना सेहत के लिए बेहतर है।
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