Up kiran,Digital Desk : जब आप बीमार होते हैं, तो डॉक्टर की दी हुई दवा पर भरोसा करते हैं, खासकर खांसी के सिरप पर। लेकिन क्या हो अगर वही सिरप नकली हो और नशे के लिए बेचा जा रहा हो? उत्तर प्रदेश में कुछ ऐसा ही खतरनाक नेटवर्क चल रहा है, जिसकी जड़ें इतनी गहरी हैं कि अब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसियों में से एक, प्रवर्तन निदेशालय (ED), को इस मामले में उतरना पड़ा है।
यह कहानी किसी फिल्म की तरह है। प्रदेश के कई जिलों में, और यहाँ तक कि दूसरे राज्यों में भी, नशे वाले कफ सिरप बेचने वाला एक पूरा गैंग काम कर रहा था। ये लोग सिर्फ छोटे-मोटे अपराधी नहीं हैं, इनके तार पूर्वांचल के बड़े-बड़े बाहुबलियों और नेताओं से जुड़े हैं, जो इन्हें बचाने के लिए हर तरह की मदद करते थे।
अब ED खंगालेगी पूरी कुंडली
मामला इतना बड़ा है कि अब ED ने इन सब पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ED की टीम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड पुलिस से संपर्क करके इस गैंग के खिलाफ दर्ज सारी FIR इकठ्ठा कर रही है। अब जांच सिर्फ नकली सिरप बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि ED यह पता लगा रही है कि इस काले कारोबार से कमाई गई करोड़ों की दौलत कहाँ छिपाई गई है।
ED के निशाने पर शुभम जायसवाल, अमित सिंह टाटा, और बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह जैसे 50 से भी ज़्यादा लोग हैं, जिन पर वाराणसी, जौनपुर, लखनऊ और गाजियाबाद जैसे दर्जनों जिलों में केस दर्ज हैं। जल्द ही इन सभी पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज होगा और इनके ठिकानों पर छापे मारे जाएंगे।
कहानी का सबसे बड़ा मोड़: बाहुबलियों का हाथ
जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वो यह है कि इस पूरे गैंग को पूर्वांचल के दो बाहुबली और राजनेता चला रहे थे। इनमें से एक तो पूर्व सांसद भी रह चुका है। पता चला है कि गैंग का मुख्य सरगना शुभम जायसवाल इस बाहुबली नेता को प्रोटेक्शन मनी (हफ्ता) भी देता था। अब ED इस नेता की कंपनियों के जरिए हुए सारे लेन-देन की भी जांच कर रही है। इतना ही नहीं, दवा विभाग के वो अफसर भी जांच के घेरे में हैं, जिन्होंने आँख बंद करके इन नकली दवा की फर्मों को लाइसेंस बांट दिए थे।
पुलिस भी कर रही है बड़ी तैयारी
एक तरफ जहाँ ED पैसों की जांच कर रही है, वहीं वाराणसी पुलिस की स्पेशल टीम (SIT) इन सभी अपराधियों का एक कच्चा-चिट्ठा तैयार कर रही है, ताकि इन पर गैंगस्टर एक्ट लगाया जा सके। गैंगस्टर एक्ट लगने के बाद, इस गैंग ने अपराध से जो भी संपत्तियां बनाई हैं, उन सभी को ज़ब्त कर लिया जाएगा।
पिछले 48 घंटों में ही जौनपुर, भदोही और सोनभद्र जैसे छह जिलों में 11 दवा फर्मों पर FIR दर्ज की गई है। अब तक पूरे प्रदेश में 98 से ज़्यादा मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। यह दिखाता है कि प्रशासन इस जानलेवा नेटवर्क को खत्म करने के लिए पूरी तरह से एक्शन में है।
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