अखिलेश यादव का राजनाथ सिंह पर करारा पलटवार, गरमाई यूपी की सियासत
उत्तर प्रदेश की राजनीति के गलियारों में बयानों के तीर इन दिनों अपने चरम पर हैं और सूबे के सियासी तापमान को बढ़ाने का काम किया है समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने। देश के रक्षा मंत्री और लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) के हालिया राजनीतिक बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने एक ऐसा धारदार तंज कसा है जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि डबल इंजन की सरकार का राग अलापने वाले लोग भले ही दिल्ली से रिमोट कंट्रोल चलाने की बात करते हों, लेकिन असलियत यह है कि आज के समय में 'असली खेल तो लखनऊ के इंजन का चल रहा है' और इसी लखनऊ के इंजन की वजह से प्रदेश की जनता तमाम परेशानियों से जूझ रही है। आइए एक वरिष्ठ राजनीतिक और इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि इस बयानबाजी के पीछे की इनसाइड स्टोरी क्या है और इसके क्या राजनीतिक मायने हैं।
क्या था राजनाथ सिंह का वह बयान जिस पर अखिलेश यादव ने बोला यह तीखा हमला?
इस पूरी जुबानी जंग की शुरुआत तब हुई जब देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों का गुणगान किया था। राजनाथ सिंह ने अपने चिर-परिचित शांत और सधे हुए अंदाज में कहा था कि केंद्र और राज्य में जब एक ही पार्टी की सरकार होती है, तो विकास के पहिए तेजी से घूमते हैं और जनता को योजनाओं का पूरा लाभ मिलता है। उन्होंने इशारों-इशारों में विपक्षी दलों के कामकाज के तौर-तरीकों पर सवाल उठाया था और कहा था कि जनता अब विकास के रास्ते पर आगे बढ़ चुकी है और वह किसी भी तरह के भ्रम में आने वाली नहीं है। रक्षा मंत्री के इसी बयान को आधार बनाते हुए अखिलेश यादव ने लखनऊ की इस कुर्सी और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा निशाना साधने में बिल्कुल भी देर नहीं लगाई।
अखिलेश यादव का तंज: बोले—दिल्ली और लखनऊ के बीच चल रही है वर्चस्व की खींचतान
प्रेस कॉन्फ्रेंस और चुनावी सभाओं के दौरान मुखर अंदाज में बोलते हुए अखिलेश यादव ने राजनाथ सिंह के उस बयान का जवाब देते हुए कहा कि आज उत्तर प्रदेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के भीतर ही 'दिल्ली के इंजन' और 'लखनऊ के इंजन' के बीच वर्चस्व की एक अजीब सी खींचतान चल रही है। जनता जिन बुनियादी समस्याओं—जैसे कि महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार—से त्रस्त है, उसका समाधान करने के बजाय दोनों जगह बैठे हुक्मरान केवल एक-दूसरे को नीचा दिखाने और अपनी सियासत चमकाने में लगे हुए हैं। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि जनता सब समझ चुकी है कि यह तथाकथित डबल इंजन सरकार केवल कागजों पर दौड़ रही है, जबकि जमीन पर आम आदमी का जीवन दूभर हो चुका है।
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर इस बयान का कितना पड़ेगा असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान बेहद नपा-तुला और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक ऐसे कद्दावर और सम्मानित नेता माने जाते हैं जिनका सभी दलों में एक अलग प्रभाव है, और वे आमतौर पर व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचते हुए विकासवादी मुद्दों पर बात करते हैं। ऐसे में, अखिलेश यादव द्वारा सीधे तौर पर उनके बयान को लपकते हुए 'लखनऊ के इंजन' पर सवाल उठाना यह दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी आगामी राजनीतिक मुकाबलों के लिए अपनी रणनीति को पूरी तरह धार दे रही है। पार्टी का मुख्य उद्देश्य यह साबित करना है कि राज्य स्तर पर प्रशासनिक विफलताएं और नौकरशाही का बढ़ता दखल इस सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी बन चुका है, जिसे जनता अब और बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप और भविष्य की सियासी राह
अपने इस आक्रामक रुख को जारी रखते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने बदलाव का मन बना लिया है और वे इन जुमलेबाजियों में फंसने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में युवाओं को रोजगार देने के वादे खोखले साबित हो रहे हैं और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पुलिसराज हावी हो गया है। आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी इन तमाम मुद्दों को लेकर सीधे जनता के बीच जाएगी और भाजपा सरकार की पोल खोलेगी। बहरहाल, राजनाथ सिंह और अखिलेश यादव के बीच छिड़ी इस जुबानी जंग ने उत्तर प्रदेश के सियासी पारे को काफी ऊपर ला दिया है, और आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सत्ता पक्ष की ओर से इस पलटवार पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।