कहीं आप भी ISI हॉलमार्क देखकर तो नहीं खरीद रहे सोना? हो जाएगा बड़ा धोखा, जानिए क्या है माजरा!
देश भर में त्योहारों और शादियों का सीजन शुरू होते ही सर्राफा बाजारों में सोने-चांदी के गहनों की खरीदारी में जबरदस्त उछाल देखने को मिलता है। ऐसे में हर कोई अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने और असली सोना खरीदने के लिए हॉलमार्किंग का सहारा लेता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज्वैलरी खरीदते समय अगर आप केवल 'ISI' मार्क देखकर सोना खरीद रहे हैं, तो आप बहुत बड़े धोखे और वित्तीय नुकसान का शिकार हो सकते हैं? आज के समय में सोने की शुद्धता को प्रमाणित करने के लिए सरकार ने बेहद कड़े नियम और विशिष्ट मानक तय किए हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में लाखों ग्राहक अब भी फर्जी या गलत चिह्नों के जाल में फंस जाते हैं। बाजार में कुछ सिरफिरे ठग और बेईमान दुकानदार ग्राहकों की इसी अज्ञानता का फायदा उठाकर लो-क्वालिटी के गहनों को भी असली बताकर बेच देते हैं। आइए एक जिम्मेदार रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि सोने की हॉलमार्किंग का असली माजरा क्या है और खरीदारी करते समय आपको किन-किन खास बातों पर पैनी नजर रखनी चाहिए ताकि आप अपने खून-पसीने की कमाई को लुटने से बचा सकें।
जानिए क्या है सोने पर ISI मार्क और BIS हॉलमार्क के बीच का बड़ा फर्क
आम भारतीय ग्राहकों के बीच यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी बनी हुई है कि हर प्रमाणित चीज पर 'ISI' मार्क ही लगा होता है। जबकि हकीकत यह है कि भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS (Bureau of Indian Standards) द्वारा औद्योगिक और इलेक्ट्रिकल उत्पादों (जैसे सीमेंट, प्रेशर कुकर, हेलमेट, बिजली के उपकरण आदि) की गुणवत्ता दर्शाने के लिए ISI मार्क दिया जाता है। दूसरी तरफ, सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की शुद्धता को प्रमाणित करने के लिए BIS द्वारा 'BIS हॉलमार्क' (BIS Hallmark) जारी किया जाता है। यदि कोई ज्वेलर आपको गहनों पर केवल 'ISI' की मुहर दिखाकर यह दावा कर रहा है कि सोना पूरी तरह से शुद्ध और सरकारी मानकों के अनुसार प्रमाणित है, तो समझ लीजिए कि आपके साथ बहुत बड़ा धोखा हो रहा है। सोने के आभूषणों पर ISI मार्क नहीं, बल्कि त्रिकोणीय BIS लोगो और 6 अंकों का HUID कोड होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
क्या होता है 6 अंकों वाला HUID नंबर और यह क्यों है सुरक्षा का सबसे बड़ा कवच?
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सर्राफा बाजार में होने वाली मिलावट और फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने के लिए 6 अंकों के अल्फ़ान्यूमेरिक (अक्षरों और संख्याओं के मेल) HUID यानी हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (Hallmark Unique Identification) कोड को अनिवार्य बना दिया है। जब भी आप बाजार से 14, 18, 20, 22 या 24 कैरेट का कोई सोने का आभूषण खरीदते हैं, तो उस पर तीन मुख्य निशान होने बेहद जरूरी हैं। पहला- BIS का आधिकारिक त्रिभुज वाला लोगो, दूसरा- उस सोने की शुद्धता (जैसे 22K916 या 18K750) और तीसरा- एक 6 अंकों का अनूठा HUID कोड। यह कोड हर एक आभूषण के लिए बिल्कुल अलग और अनोखा होता है। इस HUID नंबर के जरिए उस गहने का पूरा कच्चा चिट्ठा (जैसे इसे किस लैब में टेस्ट किया गया, किस ज्वेलर ने बेचा और इसकी सटीक शुद्धता क्या है) केंद्र सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता है।
उत्तर प्रदेश और देश भर के ज्वेलरी बाजारों में ठगी से बचने के लिए सतर्कता जरूरी
उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ, गोरखपुर, प्रयागराज, आगरा और बरेली जैसे बड़े सर्राफा बाजारों में त्योहारों और वैवाहिक सीजन के दौरान रोजाना अरबों रुपये के सोने का कारोबार होता है। उत्तर प्रदेश के लाखों परिवार अपनी जीवन भर की जमा पूंजी से अपनी बेटियों और बहुओं के लिए आभूषण बनवाते हैं। ऐसे में जागरूक होना बेहद जरूरी हो जाता है। अक्सर देखा गया है कि छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में कुछ स्थानीय दुकानदार ग्राहकों को बिना बिल दिए या बिना हॉलमार्क के पुराने तौर-तरीकों से आभूषण थमा देते हैं। बाद में जब ग्राहक उसी सोने को बेचने या बदलने जाता है, तो उसे भारी कटौती का सामना करना पड़ता है। उत्तर प्रदेश के ग्राहकों और युवाओं को यह सलाह दी जाती है कि वे हमेशा BIS रजिस्टर्ड ज्वेलर से ही सोने की खरीदारी करें और पक्का जीएसटी (GST) बिल जरूर लें, जिसमें HUID नंबर का स्पष्ट उल्लेख हो।
'BIS Care App' के जरिए मिनटों में ऐसे जांचें अपने सोने की असली शुद्धता
डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब अपनी जेब में रखे स्मार्टफोन के जरिए सोने की शुद्धता जांचना बेहद आसान हो चुका है। भारतीय मानक ब्यूरो ने ग्राहकों की सुविधा के लिए 'BIS Care App' नाम से एक बेहद उपयोगी मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया है। जब भी आप ज्वैलर की दुकान से कोई आभूषण पसंद करें, तो तुरंत इस ऐप को अपने फोन में खोलें और उसमें दिए गए 'Verify HUID' ऑप्शन पर जाएं। जैसे ही आप आभूषण पर छपे 6 अंकों के HUID कोड को इस ऐप में दर्ज करेंगे, आपके सामने उस गहने से जुड़ी पूरी पारदर्शी जानकारी आ जाएगी। इससे आपको तुरंत पता चल जाएगा कि ज्वेलर द्वारा किया जा रहा दावा कितना सच है या वह फर्जी हॉलमार्किंग का सहारा ले रहा है। थोड़ी सी समझदारी और सतर्कता आपको सर्राफा बाजार के बड़े से बड़े धोखे और नुकसान से हमेशा बचा सकती है।