लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर, मरम्मत पूरी होने तक नहीं देना होगा टोल
लखनऊ और कानपुर के बीच सफर करने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली को फिलहाल पूरी तरह रोक दिया है।
यह फैसला तब लिया गया जब उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों के भीतर इस आधुनिक एक्सप्रेसवे पर कई जगह दरारें आने और सड़क धंसने की शिकायतें सामने आईं। प्राधिकरण का साफ कहना है कि जब तक पूरी मरम्मत का काम मुस्तैदी से पूरा नहीं हो जाता, तब तक वाहन चालकों से कोई टोल टैक्स नहीं वसूला जाएगा।
उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क में आई दरारें
बीती 26 जुलाई को इस एक्सप्रेसवे पर किलोमीटर 64 के पास सड़क धंसने की घटना ने हर किसी को चौंका दिया। इतने बड़े प्रोजेक्ट में ऐसी लापरवाही सामने आने के बाद एनएचएआई ने तुरंत एक्शन लेते हुए तकनीकी जांच के आदेश दिए। हालांकि राहत की बात यह है कि प्रभावित हिस्से के आसपास ट्रैफिक को सुरक्षित रूप से डायवर्ट कर दिया गया है ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और सफर बिना रुकावट जारी रहे।
निर्माण कंपनी और अधिकारियों पर चला कड़ा चाबुक
इस पूरी लापरवाही को बेहद गंभीरता से लेते हुए एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को बड़ा झटका दिया है। कंपनी को डिफाल्टर घोषित करने का प्रस्ताव भेजते हुए नोटिस जारी किया गया है, जिसका मतलब है कि यह कंपनी भविष्य में एनएचएआई की किसी भी नई परियोजना में बोली नहीं लगा पाएगी। इसके अलावा दो प्रतिशत परफॉर्मेंस सिक्योरिटी का जुर्माना, तीन साल के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर प्रतिबंध और कंपनी की रेटिंग गिराने की कार्रवाई भी प्रक्रिया में है।
प्राधिकरण ने सड़क निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को तुरंत प्रभाव से हटा दिया है और उन्हें अगले दो साल के लिए मंत्रालय तथा एनएचएआई की किसी भी परियोजना से ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
इसके अलावा वर्तमान प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को उनके मूल विभाग वापस भेज दिया गया है और पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ चौरसिया के साथ उन पर भी लापरवाही के आरोप में चार्जशीट तैयार की जा रही है। तकनीकी देखरेख करने वाली संस्था थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी भविष्य के प्रोजेक्ट्स से बाहर करने की तैयारी है। सड़क की पूरी मरम्मत का करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च भी अब रियायतग्राही कंपनी को अपनी जेब से ही उठाना होगा।
कितना लगता है एक्सप्रेसवे पर टोल
इस रूट पर सफर करने के लिए पहले एक तरफ का टोल 275 रुपये तय किया गया था, जबकि पुराने हाईवे का सफर 95 रुपये में तय होता था। अगर कोई यात्री 24 घंटे के भीतर उसी रास्ते से वापस लौटता था तो उसे कुल 415 रुपये चुकाने पड़ते थे। लेकिन अब जब तक मरम्मत का काम मुकम्मल नहीं हो जाता, तब तक लोगों की जेब पर टोल का कोई बोझ नहीं पड़ेगा।