ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट का बदला नियम, 3 बार फेल हुए तो 60 दिन इंतजार
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में स्थायी (पक्का) ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के इच्छुक आवेदकों के लिए परिवहन विभाग ने नियमों में बड़ा तकनीकी फेरबदल किया है।
अब ड्राइविंग टेस्ट पास करना पहले जितना आसान नहीं रहेगा, क्योंकि विभाग ने मैनुअल व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर आधुनिक और पारदर्शी प्रणाली लागू कर दी है।
नई व्यवस्था के तहत परीक्षा अत्याधुनिक ऑटोमेटेड ट्रैक पर होगी, जहां थोड़ी सी भी मानवीय चूक भारी पड़ सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि लगातार तीन बार टेस्ट में फेल होने पर आवेदक को दोबारा आवेदन के लिए कम से कम 60 दिनों का लंबा इंतजार करना होगा।
नैनी आरटीओ में मैनुअल सिस्टम खत्म, सेंसर-CCTV कैमरों की निगरानी में टेस्ट
प्रयागराज के नैनी स्थित संभागीय परिवहन विभाग (RTO) कार्यालय में अब तक चली आ रही पारंपरिक और मैनुअल ड्राइविंग परीक्षा प्रणाली को बंद कर दिया गया है। इसकी जगह एक हाईटेक ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर शुरू किया गया है। दोपहिया और चार पहिया वाहनों के मूल्यांकन के लिए अलग-अलग ऑटोमेटेड ट्रैक तैयार किए गए हैं। पूरे ट्रैक को अत्याधुनिक सेंसर, सॉफ्टवेयर और हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है, जिससे किसी भी तरह की मानवीय सिफारिश या पक्षपात की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई है।
दो चरणों में होगा टेस्ट: पहले सिम्युलेटर पर परख, फिर असली ट्रैक पर दौड़ेंगे पहिए
नई व्यवस्था के तहत ड्राइविंग लाइसेंस के टेस्ट को दो कड़े चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में अभ्यर्थी को आधुनिक सिम्युलेटर पर बैठाया जाएगा, जहां वर्चुअल ट्रैफिक परिस्थितियों में उसकी त्वरित प्रतिक्रिया की जांच होगी। इसमें ट्रैफिक सिग्नलों का पालन, आपातकालीन स्थिति में अचानक ब्रेक लगाने की क्षमता और भीड़भाड़ में वाहन नियंत्रण को परखा जाएगा।
सिम्युलेटर टेस्ट पास करने के बाद अभ्यर्थी को दूसरे चरण यानी वास्तविक ऑटोमेटेड ट्रैक पर भेजा जाएगा। यहां ट्रैक पर लगे संवेदनशील सेंसर और सॉफ्टवेयर गाड़ी के मुड़ने, गति, रिवर्स पार्किंग और लेन अनुशासन की पल-पल की डिजिटल मॉनिटरिंग करेंगे।
300 रुपये में मिलेंगे 2 अतिरिक्त मौके, तीन बार फेल तो 60 दिन का ब्रेक
विभाग ने परीक्षार्थियों को राहत देते हुए तीन मौके देने का प्रावधान किया है। यदि कोई आवेदक पहले प्रयास में असफल हो जाता है, तो उसे अपनी कमियां सुधारने के लिए लगभग एक सप्ताह बाद दूसरा मौका दिया जाएगा। इसी तरह दूसरे प्रयास में भी फेल होने पर तीसरा मौका मिलेगा। हालांकि, दूसरे और तीसरे प्रयास के लिए अभ्यर्थी को 300-300 रुपये का अतिरिक्त शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा। अगर कोई आवेदक तीनों ही प्रयासों में सेंसर आधारित टेस्ट पास करने में नाकाम रहता है, तो उसका आवेदन रद्द माना जाएगा। परिवहन विभाग के कड़े दिशानिर्देशों के अनुसार, ऐसे अभ्यर्थी को दोबारा नए सिरे से आवेदन करने के लिए कम से कम 60 दिन (दो महीने) तक रुकना होगा, ताकि वह इस दौरान अपनी ड्राइविंग स्किल को बेहतर तरीके से सीखकर दुरुस्त कर सके।