UP वालों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी! एक लाख से ज्यादा परिवारों को मिलेगा पक्का घर, तुरंत चेक करें लिस्ट
उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अपने पक्के आशियाने की आस लगाए बैठे परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (एसएलएसएमसी) की उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण (बीएलसी) घटक के तहत 205 नगर निकायों में 1,01,483 नए आवासों के निर्माण को अंतिम मंजूरी दे दी गई है। इस नई स्वीकृति के साथ ही राज्य में पीएमएवाई-शहरी 2.0 के बीएलसी घटक के तहत स्वीकृत कुल मकानों का आंकड़ा बढ़कर 5,90,007 तक पहुंच गया है। मुख्य सचिव ने इसे पात्र, गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर करार दिया।
बैठक के दौरान किफायती आवास साझेदारी (एएचपी) घटक के अंतर्गत चल रही 13 महत्वपूर्ण आवासीय परियोजनाओं की प्रगति की भी गहन समीक्षा की गई। थर्ड पार्टी क्वालिटी मॉनिटरिंग (टीपीक्यूएम) द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) को समिति ने अपनी औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस कदम से केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली आगामी वित्तीय किस्त जारी होने का रास्ता साफ हो गया है। बैठक में प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरुप्रसाद सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें परियोजनाओं की निरंतर मॉनिटरिंग करने, निर्माण की उच्च गुणवत्ता बनाए रखने और तय समय-सीमा के भीतर लाभार्थियों को मकान सौंपने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही राज्य सरकार ने रियल एस्टेट, उद्योग और संस्थागत विकास को गति देने के लिए भू-उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज चेंज) के पुराने व लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण की बड़ी पहल शुरू की है। शासन स्तर पर ऐसे सभी मामलों का परीक्षण कराया जाएगा जहां प्रक्रियागत अड़चनों के कारण फाइलें रुकी हुई हैं। नई व्यवस्था के तहत विवादित मामलों को छोड़कर, छोटी-मोटी तकनीकी आपत्तियों को जल्द दूर करते हुए मंजूरी देने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। विकास प्राधिकरणों को छह हजार वर्ग मीटर तक के भूखंडों के भू-उपयोग बदलने के पूर्ण अधिकार पहले ही सौंपे जा चुके हैं, जबकि इससे बड़े मामलों का फैसला शासन स्तर पर लिया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि आवासीय से व्यावसायिक और कृषि से अन्य श्रेणियों में भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों को बेवजह न अटकाया जाए ताकि प्रदेश में विकास और निवेश की रफ्तार को नई तेजी मिल सके।