UP में रूह कंपा देने वाला कांड: चलती कार में 10वीं की छात्रा से 7 घंटे तक दरिंदगी, थाने के सामने से गुजरती रही गाड़ी
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में कानून और सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बेहद खौफनाक मामला सामने आया है। मसूरी थाना क्षेत्र के पास से एक दसवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा का अपहरण कर लिया गया। दो दरिंदों ने चलती हुई कार के अंदर सात घंटे तक उसकी अस्मत के साथ खिलवाड़ किया।
हैरानी की बात यह है कि अपराधी बेखौफ होकर पीड़िता को गाड़ी में घुमाते रहे और पीड़ित बच्ची लगातार मदद की गुहार लगाती रही। इस घटना ने आम जनता की सुरक्षा और प्रशासनिक मुस्तैदी पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
थाने के सामने से गुजरी गाड़ी और सुस्त पड़ी रही पुलिस
इस सनसनीखेज वारदात के दौरान सबसे बड़ा दर्दनाक पहलू यह रहा कि आरोपियों की गाड़ी दो बार मसूरी थाने के ठीक सामने से गुजरी। इसके अलावा रास्ते में कई पुलिस चौकियां और पुलिसकर्मी भी तैनात मिले।
पीड़िता के मुताबिक गाड़ी की खिड़कियों पर काली फिल्म और सनशेड लगे हुए थे जिसके कारण अंदर का कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। दिन के समय अभियान चलाकर गाड़ियों से काली फिल्म उतरवाने का दावा करने वाली पुलिस रात के वक्त इन आरोपियों की कार को नहीं देख पाई। सात घंटे तक लगातार वाहन में जुल्म सहती रही किशोरी ने कई बार भागने की कोशिश की लेकिन हर बार उसकी उम्मीदें टूट गईं। रास्ते में आरोपियों ने एक मेडिकल स्टोर से कुछ दवाइयां भी खरीदीं और एक फार्म हाउस पर भी रुके जहां गार्ड ने उनका गेट खोला था।
चार दिन तक चक्कर काटती रही मां और टालमटोल करती रही खाकी
मामले में पुलिस की संवेदनशीलता की भी पोल खुल गई है। पीड़िता की मां का आरोप है कि उन्होंने घटना के अगले दिन यानी 28 जुलाई की दोपहर को ही मसूरी थाने में अपनी शिकायत दर्ज करा दी थी। इसके बावजूद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय उन्हें तरह-तरह के सवालों में उलझाए रखा और टालमटोल करती रही। आखिरकार जब पुलिस कमिश्नर से गुहार लगाने की बात कही गई तब जाकर घटना के चार दिन बाद यानी एक अगस्त को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। हालांकि एसीपी सुनील कुमार सिंह का कहना है कि शुरुआती स्तर पर कुछ तथ्य विरोधाभासी लग रहे थे जिनका सत्यापन करने के बाद ही कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।
सीसीटीवी और मोबाइल लोकेशन से पकड़े गए दोनों आरोपी
दबाव बढ़ने के बाद हरकत में आई पुलिस ने कार के नंबर और मोबाइल फोन की लोकेशन को ट्रैक करके पिलखुवा के आजमपुर दहपा गांव के रहने वाले दोनों मुख्य आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए दरिंदों की पहचान मुजाहिद और सलीम अख्तर के रूप में हुई है जो आपस में अच्छे दोस्त हैं और ईंट भट्ठे का कारोबार करते हैं। इनमें से मुजाहिद पिलखुवा थाने का एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर भी बताया जा रहा है। पुलिस पूछताछ में दोनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है और पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई कार को भी अपने कब्जे में ले लिया है। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके के लोगों में भारी गुस्सा और रोष व्याप्त है।