शिवा मर्डर केस में यूपी एसटीएफ का बड़ा एक्शन: 11 दिन की आंखमिचौनी के बाद नागपुर से दबोची गई मॉडल श्रद्धा दुबे
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित कारोबारी शिवा शर्मा हत्याकांड में आखिरकार कानून के लंबे हाथों ने मुख्य आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे को दबोच ही लिया है। पिछले 11 दिनों से पुलिस और जांच एजेंसियों को लगातार चकमा दे रही श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और उनके ड्राइवर को यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस की संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र के नागपुर से घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। 9 अक्टूबर की रात लखनऊ के पॉश इलाके हजरतगंज स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट में हुई सनसनीखेज वारदात के बाद से ही तीनों फरार चल रहे थे। आरोपियों पर पुलिस उपायुक्त मध्य की ओर से 25-25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 हजार रुपये तक करने की संस्तुति की गई थी। लगातार ठिकाने बदल रही श्रद्धा दुबे पर आधुनिक सर्विलांस और एसटीएफ के तेजतर्रार नेटवर्क की नजर थी, जिसके बाद नागपुर में एक गुप्त ठिकाने पर दबिश देकर इस हाई-प्रोफाइल फरारी का अंत कर दिया गया।
अवध ग्रीन अपार्टमेंट की वो खौफनाक रात: चौथी मंजिल से नीचे कैसे गिरे शिवा शर्मा?
राजधानी लखनऊ के अलीगंज सेक्टर-एफ निवासी 28 वर्षीय शिवा शर्मा शहर के एक प्रतिष्ठित युवा कारोबारी थे, जो 'वंदे मातरम चिकन' के नाम से कपड़ों का कारोबार और 'आंगन' नाम से मशहूर रेस्टोरेंट संचालित करते थे। शिवा पिछले करीब चार महीने से मॉडल श्रद्धा दुबे के साथ हजरतगंज के अवध ग्रीन अपार्टमेंट के फ्लैट में रह रहे थे। 9 अक्टूबर की देर शाम अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में शिवा शर्मा चौथी मंजिल की बालकनी से नीचे गिर गए। जब स्थानीय लोग और गार्ड मौके पर पहुंचे, तो शिवा केवल अंतःवस्त्रों में थे और उनके चेहरे व शरीर पर कई गंभीर निशान थे। शिवा की मां रंजना शर्मा का सीधा आरोप है कि फ्लैट के भीतर उनके बेटे के साथ बेरहमी से मारपीट की गई और फिर उसे नीचे फेंक दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस पूरे मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे किए, जिसमें शिवा के शरीर पर 10 गंभीर अंदरूनी व बाहरी चोटों के निशान मिले, जो गिरने से पहले के पाए गए। डॉक्टर ने मौत का प्राथमिक कारण शॉक और अत्यधिक रक्तस्राव (हेमरेज) दर्ज किया। मां का यह भी आरोप था कि गंभीर रूप से घायल शिवा को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय आरोपी कार में घंटों इधर-उधर घुमाते रहे, जिससे समय पर इलाज न मिलने के कारण उसकी जान चली गई।
नेपाल से लखनऊ हाईकोर्ट और फिर सहारनपुर: ऐसे पुलिस को चकमा दे रही थी मॉडल
वारदात के तुरंत बाद केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में शिवा की मौत की पुष्टि होते ही श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और उनके करीबी सहयोगी मौके से फरार हो गए थे। इसके बाद श्रद्धा ने जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए एक बेहद शातिर चक्रव्यूह रचा। शुरुआत में श्रद्धा की लावारिस गाड़ी भारत-नेपाल सीमा पर बहराइच-सोनौली के पास बरामद हुई और वहां से एक रिक्शे पर बैठकर सीमा पार जाने का कथित वीडियो भी सामने आया। नेपाल में पनाह लेने के बाद श्रद्धा ने इंटरनेट मीडिया और कुछ टीवी चैनलों को वीडियो बयान जारी किए, जिसमें उसने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए घटना को आत्महत्या करार दिया और निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई। लेकिन इस पूरी फरारी का सबसे हैरान कर देने वाला मोड़ तब आया, जब पुलिस उसे सीमावर्ती इलाकों में तलाश रही थी और वह बुर्का पहनकर चोरी-छिपे लखनऊ पहुंच गई। उसने लखनऊ हाई कोर्ट परिसर में अग्रिम जमानत के हलफनामे पर हस्ताक्षर किए, अपनी तस्वीरें खिंचवाईं और पुलिस की नाक के नीचे से निकलकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के रास्ते आगरा, सहारनपुर और दिल्ली की तरफ निकल गई।
पुलिस महकमे में आया था भूचाल: डीसीपी और एसीपी पर गिरी थी गाज
राजधानी लखनऊ के इतने बड़े और चर्चित हत्याकांड की मुख्य आरोपी का हाई कोर्ट परिसर तक आकर सुरक्षित निकल जाना पुलिस प्रशासन के लिए गले की फांस बन गया था। कानून-व्यवस्था पर उठते गंभीर सवालों और शासन स्तर से मिले कड़े निर्देशों के बाद यूपी पुलिस में हड़कंप मच गया। इस बड़ी लापरवाही के चलते शासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डीसीपी मध्य विक्रांत वीर को उनके पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया, जबकि एसीपी रजनीश वर्मा को भी पद से हटा दिया गया। वहीं, हजरतगंज कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह को सीधे लाइन हाजिर कर दिया गया। इस फेरबदल के तुरंत बाद केस की सीधी कमान यूपी एसटीएफ को सौंपी गई, जिसने सर्विलांस, फास्टैग डेटा, मोबाइल टॉवर डंप और ग्राउंड इंटेलिजेंस के आधार पर श्रद्धा के हर कदम को ट्रैक करना शुरू किया। जब पुलिस टीमें दिल्ली और मुंबई में दबिश दे रही थीं, तभी टेक्निकल इनपुट मिला कि आरोपी नागपुर में छिपने की फिराक में हैं, जहां बिछाए गए जाल में वे अंततः फंस गए।
ब्लैकमेलिंग, करोड़ों की उगाही और हिस्ट्रीशीटरों से साठगांठ के गंभीर आरोप
शिवा शर्मा मर्डर मिस्ट्री की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, श्रद्धा दुबे की तथाकथित चकाचौंध भरी जिंदगी के कई स्याह पन्ने खुलकर सामने आने लगे। पुलिस की शुरुआती जांच और शिवा के परिजनों द्वारा दिए गए बयानों के मुताबिक, श्रद्धा बेहद ऐशो-आराम और लग्जरी लाइफस्टाइल की शौकीन थी। उसके संपर्क शहर के कई रसूखदार कारोबारियों, इवेंट मैनेजरों और सफेदपोश हस्तियों से थे। जांच में यह भी सामने आया कि वह लोगों से नजदीकियां बढ़ाकर उनके निजी वीडियो बना लेती थी और फिर उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर मोटी रकम वसूलती थी। इतना ही नहीं, मड़ियांव के हिस्ट्रीशीटर अभिषेक सिंह उर्फ बाबू और बाहुबली नेटवर्क से उसके संबंधों की कड़ियां भी पुलिस की रडार पर हैं। घटना के बाद सोशल मीडिया पर कुछ ऑडियो क्लिप भी वायरल हुए, जिसमें कथित तौर पर श्रद्धा शिवा को गंभीर अंजाम भुगतने, धंधा बर्बाद करने और जान से मारने की धमकियां देती सुनाई दे रही थी। परिजनों का दावा है कि शिवा ने उसके अत्यधिक खर्चों और दबाव के चलते कई लोगों से लाखों रुपये उधार ले रखे थे और इसी आर्थिक खींचतान व ब्लैकमेलिंग के चलते उसकी जान ले ली गई।
कानून के शिकंजे में आरोपी बहनें: अब सामने आएंगे हत्याकांड के अनसुलझे राज़
नागपुर से श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और उनके चालक की गिरफ्तारी के बाद अब यूपी पुलिस और एसटीएफ उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लेकर लखनऊ लाने की विधिक प्रक्रिया पूरी कर रही है। लखनऊ लाकर न्यायालय में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड की मांग करेगी, ताकि घटना की रात फ्लैट के भीतर वास्तव में क्या हुआ था, इसका हर पहलू स्पष्ट हो सके। फ्लैट की फॉरेंसिक पड़ताल में पहले ही कई आपत्तिजनक सामग्रियां और साक्ष्य जुटाए जा चुके हैं। पुलिस का कहना है कि दोनों बहनों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी कि वारदात के समय फ्लैट में कौन-कौन मौजूद था, शिवा के साथ मारपीट किसने की, और अस्पताल ले जाने में देरी क्यों की गई। इसके साथ ही, फरारी के दौरान लखनऊ से लेकर नेपाल और फिर नागपुर तक उन्हें शरण, वित्तीय मदद और कानूनी सहायता देने वाले सभी मददगारों को भी इस मामले में सह-आरोपी बनाया जाएगा।