मिशन 2027: बीजेपी क्यों चला रही है संत रविदास पर 7 महीने का मेगा अभियान? समझें दलित वोटर्स को साधने का पूरा इनसाइड प्लान

मिशन 2027: बीजेपी क्यों चला रही है संत रविदास पर 7 महीने का मेगा अभियान? समझें दलित वोटर्स को साधने का पूरा इनसाइड प्लान

उत्तर प्रदेश और पंजाब में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। बीजेपी ने 15वीं सदी के महान संत-कवि संत रविदास जी के 650वें प्रकाश उत्सव के मौके पर देशव्यापी 'श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान' की घोषणा की है। यह कोई छोटा-मोटा आयोजन नहीं, बल्कि 29 जुलाई 2026 से शुरू होकर अगले साल 20 फरवरी 2027 तक चलने वाला पूरे 7 महीने का एक मेगा आउटरीच प्रोग्राम है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि आखिर बीजेपी ने चुनावों से ठीक पहले संत रविदास को लेकर इतना लंबा और आक्रामक प्लान क्यों तैयार किया है।

क्या है 7 महीने का रूट प्लान और पवित्र मिट्टी का कनेक्शन?

बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ और दुष्यंत कुमार गौतम के अनुसार, इस अभियान की रूपरेखा बेहद भव्य तरीके से तैयार की गई है। इसकी शुरुआत 29 जुलाई को वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से हो रही है, जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। इस अभियान के तहत संत रविदास की जन्मस्थली की पावन मिट्टी को 131 पवित्र कलशों में भरा जाएगा। इनमें से 104 कलश उत्तर प्रदेश के हर गांव और 27 कलश देश के अन्य राज्यों में भेजे जाएंगे। इसके साथ ही 5 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच पंजाब के जालंधर से लेकर वाराणसी तक एक भव्य 'समरसता यात्रा' निकाली जाएगी, जो मुख्य रूप से दलित और वंचित बाहुल्य इलाकों से होकर गुजरेगी।

2027 के चुनाव से पहले 'रविदासिया' समुदाय पर नजर क्यों?

इस पूरे अभियान का सबसे बड़ा राजनीतिक सिरा उत्तर प्रदेश और पंजाब की चुनावी डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) से जुड़ा है। संत रविदास के अनुयायियों को 'रविदासिया' कहा जाता है, जो दलित समाज का एक बेहद मजबूत और प्रभावशाली हिस्सा हैं। पंजाब के दोआबा क्षेत्र (जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला) में करीब 12 लाख से अधिक रविदासिया आबादी रहती है। इस समुदाय की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2022 के पंजाब चुनावों में इस वर्ग के लिए मतदान की तारीख तक को टालना पड़ा था। वहीं अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहाँ करीब 21% दलित आबादी है और सूबे की 403 विधानसभा सीटों में से 84 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं। विपक्षी दलों (जैसे सपा और कांग्रेस) के 'PDA' फॉर्मूले और बसपा की पकड़ को कमजोर करने के लिए बीजेपी इस बड़े कोर वोट बैंक को सीधे अपने पाले में लाना चाहती है।

सिटिंग पॉलिटिक्स और एआई सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO)

स्थानीय स्तर पर इस अभियान का भौगोलिक (Geographical) प्रभाव बेहद गहरा होने वाला है। बीजेपी की योजना इसके जरिए देश भर के 21,000 से अधिक स्थानों पर 'कलश वंदन' और लगभग 51,000 मंदिरों में दीपोत्सव कराने की है। लखनऊ, नागपुर, जालंधर, वाराणसी और दिल्ली जैसे प्रमुख केंद्रों से लेकर ग्रामीण स्तर पर चौपालें, भजन संध्या और गुरुवाणी का पाठ आयोजित किया जाएगा। इस दौरान पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सीधे तौर पर दलित बस्तियों में जाकर केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं (जैसे मुफ्त राशन, आवास योजना, मुद्रा लोन) का प्रचार करेंगे और यह संदेश देंगे कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार संत रविदास के 'सबको अन्न और समानता' के संकल्प को ही जमीन पर उतार रही है।

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