लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट पर बनेगी नेचर ट्रेल, अब क्रूज से होगी नदी की सैर

लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट पर बनेगी नेचर ट्रेल, अब क्रूज से होगी नदी की सैर

लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट को लोगों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। लक्ष्मण मेला मैदान के पास करीब 700 मीटर लंबी नेचर ट्रेल तैयार की जा रही है। करीब पांच करोड़ रुपये की इस परियोजना का काम लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी एलडीए ने शुरू करा दिया है।

इस ट्रेल को इस तरह विकसित किया जाएगा कि यहां पहुंचने वाले लोगों को शहर में रहते हुए जंगल में घूमने जैसा अनुभव मिल सके। खास तौर पर परिवारों और प्रकृति पसंद करने वालों के लिए यह जगह नया आकर्षण बन सकती है।

पेड़ों और हरियाली के बीच बनेगी ट्रेल

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने स्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। योजना के तहत बड़े पेड़ों के आसपास बांस के समूह विकसित किए जाएंगे। इसके साथ लैंडस्केपिंग भी की जाएगी।

ट्रेल में जिग-जैग स्लोप बनाए जाएंगे। इससे पैदल घूमने वालों को सामान्य रास्ते के बजाय प्राकृतिक माहौल में चलने का अनुभव मिलेगा। कुछ स्थानों पर सेल्फी और स्टैंडिंग प्वाइंट भी बनाए जाएंगे। यहां से लोग हरियाली और आसपास के प्राकृतिक दृश्य देख सकेंगे।

क्रूज से गोमती की सैर का भी विकल्प

रिवर फ्रंट पर सिर्फ हरियाली ही नहीं बढ़ाई जा रही है। गोमती नदी में पर्यटकों के लिए दो क्रूज चलाने की तैयारी भी चल रही है।

पहला क्रूज एडीसीपी कार्यालय से गोमती बैराज के बीच चलेगा। इसकी लंबाई 60 मीटर और चौड़ाई 14 मीटर होगी। इसमें एक बार में 250 यात्री सफर कर सकेंगे। इस क्रूज का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसे दिसंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

दूसरा क्रूज गोमती बैराज से हनुमान सेतु के बीच संचालित किया जाएगा। इसकी लंबाई 45 मीटर और चौड़ाई 10 मीटर होगी। इसमें एक साथ 200 लोग यात्रा कर सकेंगे। अधिकारियों को इसका काम अक्टूबर तक पूरा करके संचालन शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रवेश से लेकर बच्चों के मनोरंजन तक पर जोर

एडीसीपी कार्यालय के पास रिवर फ्रंट के हिस्से को भी बेहतर बनाने का काम जारी है। करीब दो करोड़ रुपये की लागत से यहां लैंडस्केपिंग, पाथ-वे, प्रवेश द्वार, शौचालय और रेलिंग तैयार की जा रही हैं। निरीक्षण के दौरान इन कार्यों में तेजी लाने को कहा गया है।

बच्चों के लिए भी रिवर फ्रंट पर आधुनिक झूले लगाए जा रहे हैं। करीब 86 लाख रुपये की लागत वाली इस व्यवस्था को शुरू करने से पहले सुरक्षा जांच कराना जरूरी होगा। इसके लिए अधिकारियों को सेफ्टी टेस्ट कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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