एक कचौड़ी दो समोसा...कुछ इस अनोखे अंदाज में अखिलेश ने कसा बीजेपी पर तंज
लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय पर आज का सियासी माहौल पूरी तरह युवाओं के रंग में रंगा नजर आया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इस बार सत्ताधारी दल पर हमला बोलने के लिए घिसे-पिटे बयानों की जगह सोशल मीडिया और नई पीढ़ी की जुबान चुनी।
दिल्ली में हालिया महिला विरोध प्रदर्शन के दौरान गूंजे एक नारे को दोहराते हुए अखिलेश ने चुटकी ली, "एक कचौड़ी, दो समोसा, बीजेपी पर नहीं भरोसा।" हॉल में मौजूद कार्यकर्ताओं ने इस पर जमकर ठहाके लगाए, लेकिन इस तंज के पीछे सपा की एक बेहद सोची-समझी चुनावी रणनीति साफ झलक रही थी।
अखिलेश यादव ने दो टूक शब्दों में कहा कि आने वाले वक्त में 'Gen-Z' यानी आज का युवा और सपा का 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन मिलकर बीजेपी की विदाई तय करेगा। उनका पूरा जोर इस बात पर रहा कि बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असुरक्षा से जूझ रही नई पीढ़ी अब बदलाव चाहती है।
लोकतंत्र सेनानियों को 51 हजार मासिक पेंशन का वादा
प्रेस वार्ता से पहले पार्टी कार्यालय में लोकतंत्र सेनानियों के साथ एक अहम बैठक हुई। संघर्ष के दिनों को याद करते हुए अखिलेश ने एक बड़ा चुनावी वादा किया। उन्होंने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान राशि बढ़ाकर 51 हजार रुपये प्रतिमाह कर दी जाएगी। इसके साथ ही उनके इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
मौजूदा हालात पर हमला बोलते हुए सपा मुखिया ने कहा कि देश और प्रदेश इस वक्त एक अघोषित 'सोशल इमरजेंसी' से गुजर रहे हैं। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि जिस दौर में पीडीए तबके पर जुल्म और ज्यादती होगी, वह दौर आपातकाल ही कहलाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस राज में आम जनता तो बेहाल है ही, यहां तक कि सच्चे साधु-संतों को भी अपमानित होना पड़ रहा है।
बागी नेताओं की घर वापसी के संकेत और बुनियादी मुद्दों पर घेराबंदी
सियासी समीकरणों पर बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने विरोधी खेमे में हलचल तेज कर दी। उन्होंने दावा किया कि जो लोग कभी सपा छोड़कर भाजपा में चले गए थे, वे अब घुटन महसूस कर रहे हैं और वापस आना चाहते हैं। उन्होंने साफ किया कि भाजपा को हराने के संकल्प के साथ जो भी दल या नेता सपा के मंच पर आएगा, उसका खुला स्वागत है। उनके मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन में सीटों के बंटवारे और टिकट कटने के डर से कई नेता संपर्क साध रहे हैं।
राजनीतिक दावों के साथ-साथ अखिलेश ने जमीनी बुनियादी ढांचे पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क पर 74 गड्ढे उभर आए हैं, जो भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत हैं। बिजली संकट पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि जब मौजूदा सरकार के पास बिजली उत्पादन का कोई नया संयंत्र ही नहीं है, तो वह जनता को 24 घंटे बिजली कहां से मुहैया कराएगी? सपा प्रमुख ने यह भी जोड़ा कि पार्टी अब सिर्फ पारंपरिक वोट बैंक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कॉर्पोरेट सेक्टर और आधुनिक प्रोफेशनल्स के बीच भी अपनी मजबूत पैठ बनाएगी।