यूपी में 2 करोड़ से ज्यादा वोटर लिस्ट से गायब! चुनाव आयोग का कड़ा एक्शन, घर-घर आएंगे BLO
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) के बाद 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम कटने के बड़े मामले में भारत निर्वाचन आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि जिन नागरिकों के नाम पुरानी मतदाता सूची में दर्ज थे लेकिन पुनरीक्षण के बाद जारी अंतिम सूची से गायब हो गए, उनकी मौजूदा स्थिति की दोबारा गहन पड़ताल की जाएगी। इसके लिए पूरे सूबे में एक बड़ा विशेष सत्यापन अभियान शुरू हो रहा है, जिसमें बूथ लेवल अधिकारी (BLO) सीधे घर-घर पहुंचकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन करेंगे। इसके साथ ही 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए युवाओं और छूटे हुए पात्र नागरिकों के नाम भी प्राथमिकता के आधार पर जोड़े जाएंगे।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू होने से पहले कुल 15.44 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद सूची में 2 करोड़ से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। आयोग ने इन नामों को एएसडीडी (ASDD) यानी अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted), मृत (Dead) या दोहरी प्रविष्टि (Duplicate) की श्रेणी में दर्ज कर सूची से हटाया था। अब आयोग इस बात की दोबारा जमीनी तस्दीक करेगा कि हटाए गए नामों में से कितने नागरिक वास्तव में पात्र हैं और उनके नाम फिर से जोड़े जाने चाहिए।
सत्यापन अभियान के दौरान बीएलओ 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची का मिलान 7 जनवरी 2025 की सूची और उसकी पूरक सूचियों से करेंगे। इस तुलनात्मक जांच में ऐसे सभी लोगों को चिन्हित किया जाएगा जिनका नाम पिछली सूची में तो था, लेकिन ताजा सूची में नहीं है। इसके बाद बीएलओ मौके पर जाकर कारण की पड़ताल करेंगे ताकि किसी भी योग्य नागरिक का मताधिकार बेवजह न छिना हो।
प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग ने राजनीतिक दलों को भी इसमें शामिल किया है। जिन मतदाताओं के नाम मौजूदा सूची से बाहर मिले हैं, उनकी एक अलग सूची तैयार कर मान्यता प्राप्त दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) को सौंपी जाएगी। इसके अलावा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भी यह डाटा दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराएंगे, जिससे राजनीतिक दल भी छूटे हुए वास्तविक मतदाताओं के नाम पुन: दर्ज कराने में प्रशासन का सहयोग कर सकें।
इस अभियान के दौरान नए मतदाताओं को जोड़ने पर भी पूरा जोर रहेगा। पहली बार वोट देने के योग्य हुए युवाओं और छूटे हुए नागरिकों से फॉर्म-6 भरवाकर उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएंगे। इसके लिए हर मतदान केंद्र पर विशेष शिविर भी आयोजित होंगे। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि रैन बसेरों, श्रमिक बस्तियों, बेघर नागरिकों और हाशिए पर खड़े कमजोर वर्गों तक विशेष रूप से पहुंचकर उनका सत्यापन किया जाए। साथ ही कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।