राम मंदिर दान विवाद: चंदा चोरी पर फौरन हो FIR, वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार बोले- 'रामभक्तों की आस्था को पहुंची ठेस, 4 महीने में हो फैसला'
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे को लेकर उठे विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपना लिया है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष (International President) आलोक कुमार ने इस पूरे मामले में बिना देरी किए तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग तेज कर दी है।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह मामला करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था से जुड़ा है, इसलिए इस पूरे प्रकरण की त्वरित निष्पक्ष जांच (Fair Probe) होनी चाहिए और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
"एसआईटी की शुरुआती जांच के बाद अब एफआईआर जरूरी" – आलोक कुमार
इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई पर बात करते हुए विहिप अध्यक्ष ने कहा:
"एसआईटी की प्रारंभिक पड़ताल और जांच के बाद अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि इस मामले में तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज करने की सख्त जरूरत है। हमारी मांग है कि पुलिस जल्दी से जल्दी अपनी जांच पूरी करे और कोर्ट में इस केस की डे-टू-डे (रोजाना) सुनवाई हो, ताकि अधिकतम 4 महीने के भीतर फैसला आ सके। इस चंदा चोरी के विवाद से दुनियाभर के रामभक्तों की भावनाओं को गहरा आघात लगा है। इसमें जो भी शामिल हो, चाहे वह कितना ही बड़ा व्यक्ति क्यों न हो, अगर दोषी है तो उस पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।"
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर दिया बयान
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे की उठ रही मांगों पर आलोक कुमार ने कहा, "मैं चंपत जी और अनिल मिश्रा जी को व्यक्तिगत रूप से बहुत सालों से जानता हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि वे दोनों बेहद ईमानदार हैं और सही समय आने पर वे स्वयं इस (इस्तीफे) विषय पर उचित विचार करेंगे।"
विहिप (VHP) ने विवाद से बनाई दूरी, ट्रस्ट पर डाली जिम्मेदारी
इस बयान के जरिए विश्व हिंदू परिषद ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए खुद को इस प्रशासनिक और वित्तीय विवाद से पूरी तरह अलग कर लिया है। आलोक कुमार ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि मंदिर के चढ़ावे, दान राशि के रख-रखाव और संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन स्वतंत्र रूप से 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' करता है, इसमें विहिप की कोई भी प्रत्यक्ष या परोक्ष भूमिका नहीं है।
संगठन का मानना है कि संघ और विहिप की साख पर कोई आंच न आए, इसलिए चंदे में पारदर्शिता (Transparency) लाना बेहद जरूरी है।
सपा और कांग्रेस पर लगाया 2027 चुनाव के लिए राजनीति करने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब आलोक कुमार से समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस द्वारा ट्रस्ट पर उठाए जा रहे सवालों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने विपक्ष पर तीखा पलटवार किया:
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विपक्ष का इतिहास: "सपा और कांग्रेस के मुंह से ऐसी बातें शोभा नहीं देतीं। एक पार्टी (सपा) वो है जिसने अयोध्या में निहत्थे रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं, और दूसरी पार्टी (कांग्रेस) वो है जिसने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर भगवान श्रीराम को काल्पनिक चरित्र बताया था।"
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चुनाव का एजेंडा: "इन लोगों को न तो भगवान राम से कोई वास्ता है, न राम मंदिर से और न ही राम जन्मभूमि से। ये लोग सिर्फ साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।"
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निमंत्रण का जिक्र: आलोक कुमार ने याद दिलाया कि वे स्वयं इन विपक्षी नेताओं को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बुलावा देने गए थे, लेकिन आस्था की कमी के कारण ये लोग वहां नहीं आए।