18 की पानी की बोतल बीस में बेची, अब भरने पड़ेंगे एक लाख से ज्यादा

18 की पानी की बोतल बीस में बेची, अब भरने पड़ेंगे एक लाख से ज्यादा

अक्सर होटल या रेस्टोरेंट में खाने के दौरान पानी की बोतल पर छपे मूल्य (MRP) से एक-दो रुपये ज्यादा ले लिए जाते हैं और ग्राहक इसे मामूली बात समझकर छोड़ देते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक रेस्टोरेंट मालिक को महज 2 रुपये की अतिरिक्त वसूली ऐसी भारी पड़ी कि अब उसे 1 लाख 6 हजार रुपये अपनी जेब से भरने होंगे। अलीगढ़ के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (कंज्यूमर फोरम) ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

किसने सुनाया फैसला और क्या है आदेश?

उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ ने रेस्टोरेंट संचालक को अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) का दोषी माना है। आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 39(1)(k) के तहत रेस्टोरेंट मालिक को 1,00,000 रुपये (एक लाख रुपये) का जुर्माना 'उपभोक्ता कल्याण कोष' में जमा करने का कड़ा निर्देश दिया है। इसके अलावा, पीड़ित ग्राहक को मानसिक उत्पीड़न के बदले 1,000 रुपये का मुआवजा और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 5,000 रुपये (कुल 6,000 रुपये) अलग से देने का आदेश दिया गया है।

18 की बोतल के वसूले 20 रुपये, ग्राहक ने मांगा था 10 लाख मुआवजा

यह पूरा मामला 11 मार्च 2026 का है। अलीगढ़ के रहने वाले एक व्यक्ति हाथरस के एक रेस्टोरेंट में खाना खाने गए थे। भोजन के दौरान जब उन्होंने पीने के लिए पानी मांगा, तो रेस्टोरेंट ने उन्हें पैक्ड पानी की बोतल दी। उस बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 18 रुपये छपा था, लेकिन जब बिल आया तो उसमें पानी की बोतल के 20 रुपये जोड़े गए थे। इस खुली लूट और मनमानी से आहत होकर ग्राहक ने सीधा अलीगढ़ कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पीड़ित ने अपनी याचिका में मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान के लिए 10 लाख रुपये के मुआवजे के साथ 15,000 रुपये कानूनी खर्च दिलाने की मांग की थी।

नोटिस के बाद भी नहीं पहुंचा रेस्टोरेंट मालिक, बिल और फोटो बने पक्के सबूत

ग्राहक की शिकायत पर आयोग ने रेस्टोरेंट संचालक को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा, लेकिन रेस्टोरेंट की तरफ से कोई भी कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ और न ही कार्यवाही का विरोध किया गया। इसके बाद 21 मई 2026 को आयोग ने रेस्टोरेंट के खिलाफ एकतरफा (Ex-parte) सुनवाई का फैसला लिया। जांच के दौरान कोर्ट ने 11 मार्च 2026 का पक्का बिल और पानी की बोतल की तस्वीर को मुख्य सबूत के तौर पर देखा। बिल में साफ तौर पर 20 रुपये की वसूली दर्ज थी, जबकि बोतल की फोटो में MRP 18 रुपये स्पष्ट दिख रही थी।

45 दिन की मोहलत, आदेश न मानने पर होगी जेल या कड़ी कार्रवाई

सारे सबूतों की पड़ताल के बाद आयोग ने अपने फैसले में साफ कहा कि रेस्टोरेंट ने तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूलकर सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन किया है। आयोग ने रेस्टोरेंट मालिक को 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता कल्याण कोष में 1 लाख रुपये और शिकायतकर्ता को 6,000 रुपये अदा करने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि तय समय सीमा में इस आदेश का पालन नहीं किया गया, तो रेस्टोरेंट संचालक के खिलाफ अधिनियम की धारा 72 के तहत सख्त दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।