चंपत राय को क्लीन चिट मिलने पर भड़के सपा सांसद अवधेश प्रसाद, बोले- 'सरकार बचा ले, लेकिन प्रभु राम के न्याय से कोई नहीं बचेगा'; जांच रिपोर्ट पर उठाए गंभीर सवाल

चंपत राय को क्लीन चिट मिलने पर भड़के सपा सांसद अवधेश प्रसाद, बोले- 'सरकार बचा ले, लेकिन प्रभु राम के न्याय से कोई नहीं बचेगा'; जांच रिपोर्ट पर उठाए गंभीर सवाल

अयोध्या स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान पात्रों और गणना कक्ष से नकदी व चढ़ावे के जेवरात गायब होने के बहुचर्चित मामले में विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी गई अंतिम जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का नाम न होने तथा उन्हें पूर्ण रूप से क्लीन चिट दिए जाने पर विपक्षी दलों ने तीखा ऐतराज जताया है।

फैजाबाद (अयोध्या) लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस क्लीन चिट को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला है। सपा सांसद ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह केवल कुछ लाख या करोड़ रुपयों की सामान्य चोरी का मामला नहीं है, बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पावन दरबार में देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की गाढ़ी कमाई और अटूट आस्था पर डाली गई खुली डकैती है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता के प्रभाव में चाहे किसी को भी कानूनी रूप से बचा लिया जाए, लेकिन जनता और ईश्वर की अदालत में कोई भी गुनहगार बच नहीं सकेगा।

'यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर डकैती है': अवधेश प्रसाद का सीधा हमला

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने अपने आधिकारिक आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राम मंदिर में आने वाला चढ़ावा देश के उन गरीब, किसान, मजदूर और आम नागरिकों की खून-पसीने की कमाई से आता है, जो अपनी झोली से एक-एक रुपया प्रभु राम के चरणों में समर्पित करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब दान गणना कक्ष में महीनों तक संगठित तरीके से नोटों की गड्डियां गायब की जा रही थीं, तो शीर्ष प्रबंधन का यह कहना कि उन्हें कुछ पता ही नहीं था, किसी भी दृष्टि से गले उतरने योग्य नहीं है।

अवधेश प्रसाद ने कहा कि जब मंदिर के भीतर 70 से अधिक बार नकदी चुराने की पुष्टि हो चुकी है और कर्मचारियों के पास से आभूषण व नकदी बरामद हुई है, तो केवल निचले स्तर के संविदा कर्मियों और सहायकों को जेल भेजकर शीर्ष पदाधिकारियों को पूरी तरह दोषमुक्त करार दे देना जांच प्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिस तरह से रिपोर्ट तैयार करवाई है, उससे करोड़ों रामभक्तों की धार्मिक भावनाओं को गहरा आघात पहुंचा है।

'जब-जब होई धरम कै हानी...': धार्मिक चौपाई सुनाकर सरकार को घेरा

अपने बयान के दौरान सपा सांसद ने श्रीरामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई का उल्लेख करते हुए सरकार और मंदिर प्रबंधन पर कड़ा तंज कसा। उन्होंने कहा, "जब-जब होई धरम कै हानी, बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी। तब-तब प्रभु धरि विविध शरीरा, हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा॥"

सांसद ने कहा कि हमारे सनातन धर्म ग्रंथों में यह स्पष्ट लिखा है कि जब भी धर्म के नाम पर पाखंड, भ्रष्टाचार और अधर्म बढ़ता है, तो कोई न कोई दैवीय शक्ति उसका संज्ञान अवश्य लेती है। उन्होंने कहा कि आज सरकार चाहे अपनी पूरी प्रशासनिक मशीनरी और जांच एजेंसियों को लगाकर चंपत राय और अनिल मिश्रा को बेदाग साबित करने की कोशिश कर ले, लेकिन सच को ज्यादा दिनों तक दबाया नहीं जा सकता। समय चक्र का पहिया जब घूमेगा, तो इस पाप के असल सूत्रधारों को कानून और कुदरत दोनों की कड़ी सजा भुगतनी पड़ेगी।

एसआईटी जांच की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर उठाए तीखे सवाल

अयोध्या सांसद ने शासन द्वारा गठित प्रशासनिक एसआईटी की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जांच की दिशा शुरू से ही केवल लीपापोती करने के लिए तय की गई थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पहले दिन से ही यह प्रचारित किया जा रहा था कि बड़े नेताओं का नाम बाहर रखा जाएगा, ठीक वैसा ही हुआ।

अवधेश प्रसाद ने सवाल किया कि यदि मंदिर के संचालन, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, सुरक्षा ऑडिट और दैनिक हिसाब-किताब के लिए अधिकृत शीर्ष पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं, तो फिर ट्रस्ट के बड़े पदों पर बैठने का औचित्य क्या रह जाता है? उन्होंने कहा कि ट्रस्टियों ने 27 जून को अपने पदों से इस्तीफा ही क्यों दिया था यदि वे पूरी तरह निष्कलंक थे? सांसद ने आरोप लगाया कि केवल जनता के बढ़ते गुस्से और संसद में उठने वाले सवालों से बचने के लिए इस्तीफों का नाटक किया गया और बाद में अनुकूल रिपोर्ट तैयार कराकर उन्हें क्लीन चिट दे दी गई।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच और विशेष कानून की मांग

सपा सांसद ने कहा कि वे इस संवेदनशील मामले को संसद के आगामी सत्र में भी पूरी ताकत से उठाएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा जवाब मांगेंगे। उन्होंने मांग दोहराई कि राज्य सरकार की पुलिस और नौकरशाहों की एसआईटी से निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग गठित किया जाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त उन्होंने मांग की कि प्रभु श्रीराम के मंदिर और देश के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों में दान-चढ़ावे की चोरी को रोकने के लिए संसद द्वारा एक कड़ा विशेष कानून बनाया जाना चाहिए, जिसमें मंदिर की संपत्ति में हेरफेर करने वालों को सामान्य चोरी नहीं बल्कि देशद्रोह और आस्था से विश्वासघात की श्रेणी में रखकर कठोरतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान हो।

अयोध्या की वैश्विक छवि और स्थानीय नागरिकों की प्रतिष्ठा को लगा कलंक

अवधेश प्रसाद ने भावुक होते हुए कहा कि अयोध्या एक वैश्विक धार्मिक और आध्यात्मिक राजधानी के रूप में उभर रही है। पूरी दुनिया से श्रद्धालु मर्यादा, त्याग और सत्य के दर्शन करने यहां आ रहे हैं। ऐसे में मंदिर के गर्भगृह और दान पेटी से लगातार हो रही चोरी की घटनाओं ने पूरी अयोध्या नगरी और यहां के संतों-नागरिकों की प्रतिष्ठा को पूरे विश्व में धूमिल किया है।

उन्होंने कहा कि अयोध्या का जनमानस बेहद दुखी है कि जिस पावन भूमि पर भगवान राम ने मर्यादा का सर्वोच्च आदर्श स्थापित किया, वहां के ट्रस्ट प्रबंधन में बैठे लोग चढ़ावे की सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं कर सके। स्थानीय नागरिकों और साधु-संतों के भीतर इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती की जा रही है।

अंबेडकरनगर में आईपीएस की मां की मौत पर भी उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

प्रेस वार्ता के दौरान सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए अंबेडकरनगर में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आशुतोष मिश्रा की मां की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने मृतका के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक अत्यंत धर्मपरायण महिला थीं और उनसे उनके पारिवारिक संबंध थे।

पुलिस द्वारा मौत का प्रारंभिक कारण हार्ट अटैक बताए जाने पर सवाल खड़े करते हुए सांसद ने दावा किया कि मृतका के मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ पाया गया था और घर से कीमती जेवरात भी गायब थे। उन्होंने कहा कि जब एक उच्च पदस्थ आईपीएस अधिकारी के परिवार के साथ ऐसी संदिग्ध घटना घट सकती है और पुलिस उसे सामान्य बीमारी बताकर रफा-दफा करने का प्रयास करती है, तो प्रदेश के आम नागरिक की सुरक्षा की क्या स्थिति होगी? उन्होंने इस पूरे प्रकरण की भी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच कराने तथा दोषियों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की।

उत्तर प्रदेश में गरमाया सियासी घमासान, 2027 चुनाव से पहले वार-पलटवार

अवधेश प्रसाद के इस आक्रामक बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राम मंदिर और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं ने अवधेश प्रसाद के बयानों को तथ्यहीन और चुनावी राजनीति से प्रेरित करार देते हुए कहा है कि सपा नेता आस्था के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं, जबकि एसआईटी ने साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर निष्पक्ष रिपोर्ट दी है।

वहीं समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने अवधेश प्रसाद के रुख का समर्थन करते हुए सरकार से पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राम मंदिर के दान प्रबंधन, एसआईटी रिपोर्ट और विपक्षी हमलों का यह दौर आने वाले दिनों में और अधिक तेज होने के स्पष्ट संकेत दे रहा है।

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