बेटी के जन्म से पढ़ाई तक मदद, योगी सरकार की इन 3 योजनाओं का जरूर उठाएं फायदा
उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बेटियों को सामाजिक व आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है।
इन पहलों का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा, विवाह और असहाय महिलाओं के भरण-पोषण के लिए सीधी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। सभी योजनाओं का लाभ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजा जाता है।
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना: पढ़ाई से लेकर जन्म तक आर्थिक संबल
बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहित करने और उनकी उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह योजना बेहद प्रभावी साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत पात्र बेटियों को कुल छह चरणों में वित्तीय मदद दी जाती है। बालिका के जन्म, संपूर्ण टीकाकरण, कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश के साथ-साथ 12वीं उत्तीर्ण कर स्नातक या डिप्लोमा पाठ्यक्रम में दाखिला लेने पर किस्तों में राशि ट्रांसफर की जाती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए परिवार की वार्षिक आय निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए और सामान्यतः एक परिवार की अधिकतम दो बेटियां इसके लिए पात्र मानी जाती हैं।
निराश्रित महिला पेंशन योजना: बेसहारा महिलाओं को हर महीने सहारा
पति की मृत्यु के उपरांत आर्थिक संकट से जूझ रही महिलाओं के जीवनयापन को सुगम बनाने के लिए निराश्रित महिला पेंशन योजना चलाई जा रही है। इसके तहत पात्र विधवा महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह की दर से पेंशन सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। यह नियमित राशि उनके दैनिक घरेलू खर्चों और बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में मददगार साबित होती है।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना: कन्यादान के लिए 1 लाख रुपये तक की मदद
आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के वैवाहिक खर्च का बोझ कम करने के लिए यह योजना बनाई गई है। इस योजना में प्रत्येक पात्र जोड़े के विवाह पर कुल 1 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। इस कुल बजट में से 64 हजार रुपये की मुख्य धनराशि वधू के बैंक खाते में भेजी जाती है, 21 हजार रुपये मूल्य का दैनिक उपयोग का उपहार सामान दिया जाता है और 15 हजार रुपये सामूहिक विवाह कार्यक्रम की प्रशासनिक व्यवस्था व आयोजन पर खर्च किए जाते हैं।