2017 की वो बड़ी गलती... जिससे सबक लेकर अब यूपी में खूंखार रणनीति बना रही है कांग्रेस!

2017 की वो बड़ी गलती... जिससे सबक लेकर अब यूपी में खूंखार रणनीति बना रही है कांग्रेस!

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर राजनीतिक हलचल अभी से तेज हो गई है. भले ही चुनाव में कुछ महीने बाकी हों, लेकिन सियासी दलों ने अपनी जमीन मजबूत करनी शुरू कर दी है. इसी कड़ी में विपक्षी गठबंधन को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच अंदरखाने सुगबुगाहट तेज हो गई है. कांग्रेस इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने के मूड में है और वह समय रहते समाजवादी पार्टी के साथ सीट-शेयरिंग के पेंच को सुलझा लेना चाहती है. पार्टी का मुख्य जोर अंधाधुंध सीटों की संख्या बढ़ाने के बजाय सिर्फ 'जिताऊ सीटों' पर फोकस करने का है.

समय पर गठबंधन और सीट-शेयरिंग पर जोर

कांग्रेस पार्टी के भीतर यह आम राय बन चुकी है कि साल 2017 के विधानसभा चुनावों में हुई गलतियों से सबक लिया जाना चाहिए. उस दौरान गठबंधन और सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसला लेने में काफी देर हो गई थी, जिसका सीधा नुकसान दोनों दलों को धरातल पर उठाना पड़ा था. स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और वोटर्स के बीच सही तालमेल न बैठ पाने के कारण चुनावी नैरेटिव कमजोर पड़ गया था. यही वजह है कि इस बार कांग्रेस नेतृत्व कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है और वह चाहती है कि समाजवादी पार्टी के साथ बातचीत का सिलसिला जल्द से जल्द औपचारिक रूप ले ताकि जमीनी स्तर पर मजबूत तैयारी का पूरा समय मिल सके.

संसद भवन में हुई थी खास रणनीतिक बैठक

हाल ही में संसद सत्र के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के सभी पार्टी सांसदों के साथ एक अहम बैठक की थी. इस उच्चस्तरीय मंथन में उत्तर प्रदेश के सभी सांसदों ने एक सुर में यह सलाह दी थी कि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन समय रहते तय हो जाना चाहिए. जानकारों का मानना है कि यह बैठक सपा प्रमुख अखिलेश यादव की दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ हुई मुलाकात के ठीक बाद आयोजित की गई थी, जिसमें राज्य की राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई थी. कांग्रेस नेताओं का साफ कहना है कि सीटों का यह बंटवारा किसी पारंपरिक संख्या के फॉर्मूले के तहत नहीं, बल्कि इस जमीनी हकीकत पर होना चाहिए कि किस निर्वाचन क्षेत्र में गठबंधन को जीत की सबसे ज्यादा संभावना नजर आती है.

उत्तर प्रदेश में सीएम पद को लेकर कांग्रेस की क्या है मंशा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए बेताब कांग्रेस ने अपनी मंशा भी जाहिर कर दी है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कांग्रेस राज्य में अपना मुख्यमंत्री चाहती है, हालांकि इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस पर अंतिम फैसला समाजवादी पार्टी को ही करना है. कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य राज्य में अपनी सांगठनिक मौजूदगी को फिर से विस्तार देना है और इसके लिए मजबूत और प्रभावी सीटों पर चुनाव लड़ना बेहद जरूरी है. वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस की संख्या काफी कम है, इसलिए पार्टी का मानना है कि केवल इसलिए किसी सीट पर दावा नहीं ठोका जाना चाहिए कि वहां पहले चुनाव लड़ा गया था, बल्कि अब पैमाना सिर्फ और सिर्फ जीत की क्षमता होना चाहिए.