बुलंदशहर में दर्दनाक हादसा: खुले नाले में बही मासूम, 90 घंटे के कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद काली नदी से मिला 7 वर्षीय चारु का शव
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पिछले दिनों शहर के एक खुले नाले में बही 7 वर्षीय मासूम बच्ची चारु का शव लगभग 90 घंटे चले सघन सर्च ऑपरेशन के बाद आखिरकार काली नदी से बरामद कर लिया गया है। एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय पुलिस की अथक कोशिशों के बावजूद बच्ची को जिंदा नहीं बचाया जा सका। जैसे ही चारु का शव नदी से बाहर निकाला गया, परिजनों में चीख-पुकार मच गई और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका की लापरवाही को बेनकाब कर दिया है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
जानकारी के अनुसार, बुलंदशहर के एक रिहायशी इलाके में रहने वाली 7 साल की मासूम चारु घर के पास ही खेल रही थी। हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव था और सड़क किनारे बना एक गहरा नाला पूरी तरह से खुला हुआ था। पानी के तेज बहाव और जलभराव के कारण चारु नाले के खुले हिस्से को देख नहीं पाई और पैर फिसलने की वजह से वह उसमें समा गई। नाले में पानी का बहाव इतना तेज था कि वह मासूम को पलक झपकते ही अपने साथ बहा ले गया। आसपास के लोगों ने जब शोर सुना, तो तुरंत पुलिस और प्रशासन को इसकी सूचना दी।
90 घंटे तक चला महा-रेस्क्यू ऑपरेशन
मासूम चारु को तलाशने के लिए प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला। जलभराव और नाले की गंदगी के कारण रेस्क्यू टीमों को शुरुआत में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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टीमों की तैनाती: स्थानीय गोताखोरों के साथ-साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया गया।
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सर्च ऑपरेशन का दायरा: नाला आगे जाकर सीधे काली नदी में मिलता है, जिसके चलते रेस्क्यू टीमों ने नाले से लेकर नदी तक कई किलोमीटर के दायरे में सर्च ऑपरेशन चलाया।
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90 घंटे बाद सफलता: लगातार चार दिनों तक दिन-रात चले इस खोज अभियान के बाद, घटनास्थल से काफी दूर काली नदी के बहाव क्षेत्र में चारु का शव तैरता हुआ मिला।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, प्रशासन पर फूटा गुस्सा
चारु का शव घर पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव व मोहल्ले के लोग इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं। वहीं, इस घटना को लेकर स्थानीय निवासियों में प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ भारी गुस्सा देखा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि नगर पालिका और संबंधित विभागों को कई बार खुले नालों को ढकने के लिए शिकायत की गई थी, लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। जनता का कहना है कि अगर समय रहते नाले पर स्लैब रखवा दी गई होती, तो आज एक मासूम की जान न जाती।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने और दोषी कर्मचारियों व लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।