UP BJP Internal Survey: खतरे में 60 सीटें? सीक्रेट रिपोर्ट का दावा- कटेंगे 35% विधायकों के टिकट

UP BJP Internal Survey: खतरे में 60 सीटें? सीक्रेट रिपोर्ट का दावा- कटेंगे 35% विधायकों के टिकट

उत्तर प्रदेश विधानसभा इलेक्शन से पहले BJP के लिए कराए गए एक आंतरिक सर्वे में पार्टी की चुनावी स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार यदि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव होते हैं, तो BJP को 2022 के मुकाबले 52 से 67 सीटों का नुकसान हो सकता है और पार्टी 190 से 205 सीटों के बीच सिमट सकती है। 

पूर्वांचल में सबसे ज्यादा नाराजगी, 35% विधायकों पर गिरेगी गाज

बहुमत के लिए 202 सीटों की आवश्यकता होती है, जबकि वर्तमान में BJP के 257 विधायक हैं। सर्वे में सुझाव दिया गया है कि संभावित नुकसान से बचने के लिए पार्टी को अपने लगभग 30 से 35 प्रतिशत मौजूदा विधायकों के टिकट बदलने पर विचार करना चाहिए। सबसे अधिक असंतोष पूर्वांचल क्षेत्र के विधायकों को लेकर सामने आया है।

ये सर्वे BJP के लिए काम करने वाली एजेंसी 'नेशन विद नमो' ने मार्च से जुलाई के बीच सभी विधानसभा क्षेत्रों में लोगों से बातचीत कर तैयार किया। सर्वे में मतदाताओं से स्थानीय विधायक के कामकाज, क्षेत्रीय समस्याओं, जातीय समीकरण और संभावित उम्मीदवारों को लेकर राय ली गई। रिपोर्ट में जनता की नाराजगी को दो हिस्सों में बांटा गया है- सरकार की नीतियों को लेकर असंतोष और स्थानीय विधायकों के प्रदर्शन को लेकर नाराजगी।

सरकारी नीतियों से जुड़े प्रमुख मुद्दों में यूजीसी के नए नियम, राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना, थाना-तहसील स्तर पर शिकायतों के समाधान में देरी, भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण जैसे विषय शामिल रहे। वहीं विधायकों के खिलाफ लोगों ने क्षेत्र में सक्रिय न रहने, विकास कार्यों की कमी और ठेका, पट्टा व खनन जैसे मामलों से जुड़ने के कारण खराब छवि जैसी शिकायतें दर्ज कराईं।

सर्वे में सुझाव दिया गया है कि यदि BJP समय रहते उम्मीदवारों में बदलाव, स्थानीय समीकरणों और जनभावनाओं को ध्यान में रखे तो चुनावी स्थिति में सुधार संभव है। रिपोर्ट के अनुसार सही उम्मीदवार चयन और चुनाव के समय बनने वाले मुद्दों के आधार पर अनुमानित परिणामों में बदलाव भी हो सकता है।

सर्वे टीम ने यह भी आकलन किया कि यदि चुनाव राष्ट्रवाद, धर्म और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहता है तो BJP को लाभ मिल सकता है। वहीं यदि समाजवादी पार्टी 2024 लोकसभा चुनाव की तरह जातीय समीकरण और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाती है, तो BJP के सामने चुनौती बढ़ सकती है। 

रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि नई पीढ़ी के मतदाताओं में यादव और गैर-यादव राजनीति को लेकर पहले जैसी दूरी नहीं रही है। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सरकार और विधायकों के प्रदर्शन पर अलग से स्वतंत्र सर्वे करा रहे हैं, जिसके आधार पर आगे की चुनावी रणनीति तय की जा सकती है।

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