यूपी बीजेपी का डिजिटल धमाका! आंतरिक परीक्षा में 90% कार्यकर्ता पास, 'डिजिटल लर्निंग' में उत्तर प्रदेश बना देश का नंबर-1 राज्य

यूपी बीजेपी का डिजिटल धमाका! आंतरिक परीक्षा में 90% कार्यकर्ता पास, 'डिजिटल लर्निंग' में उत्तर प्रदेश बना देश का नंबर-1 राज्य

उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी दंगल से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह हाईटेक और डिजिटल बनाने में एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' के संकल्प को जमीनी स्तर पर उतारते हुए पार्टी ने हाल ही में अपने कार्यकर्ताओं के लिए एक विशेष आंतरिक परीक्षा (Internal Assessment/DLP Exam) आयोजित की थी।

इस परीक्षा के नतीजे बेहद चौंकाने वाले और ऐतिहासिक रहे हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश के 90% से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों ने शानदार अंकों के साथ परीक्षा पास की है। इस बड़े पैमाने पर चलाए गए अभियान की बदौलत उत्तर प्रदेश अब कार्यकर्ताओं की डिजिटल ट्रेनिंग और 'डिजिटल लर्निंग' (Digital Learning) के मामले में पूरे देश में पहले पायदान पर आ गया है।

क्या था 'डिजिटल लर्निंग प्रोग्राम' (DLP) और इसकी परीक्षा?

भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर शुरू किया गया डिजिटल लर्निंग प्रोग्राम (Digital Learning Program - DLP) एक राष्ट्रव्यापी डिजिटल साक्षरता और राजनीतिक प्रशिक्षण अभियान है। इसके तहत पार्टी ने एक विशेष मोबाइल ऐप तैयार किया है, जिसे पार्टी के सभी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए डाउनलोड करना अनिवार्य बनाया गया था।

इस ऐप के माध्यम से कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा, मोदी-योगी सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं की बारीकियों, डेटा प्रबंधन और सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल को लेकर ऑनलाइन मॉड्यूल और वीडियो के जरिए ट्रेनिंग दी गई। कोर्स पूरा होने के बाद ऐप पर ही एक 'आंतरिक परीक्षा' (Online Test) ली गई, जिसमें सरकार की योजनाओं और संगठन से जुड़े बहुविकल्पीय (MCQ) प्रश्न पूछे गए थे।

क्यों पड़ी इस आंतरिक परीक्षा की जरूरत?

भाजपा द्वारा अपने ही कार्यकर्ताओं की परीक्षा लेने और उन्हें डिजिटल योद्धा (Digital Warriors) के रूप में तैयार करने के पीछे तीन बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक कारण हैं:

  • विपक्ष के सोशल मीडिया नैरेटिव को काटना: वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में विपक्ष (विशेष रूप से सपा-कांग्रेस गठबंधन) सोशल मीडिया पर आक्रामक तरीके से एक्टिव है। विपक्ष के फेक नैरेटिव और मुद्दों (जैसे पीडीए और अन्य स्थानीय मुद्दे) को डिजिटल पटल पर तथ्यों के साथ सीधे मात देने के लिए भाजपा को एक ट्रेंड सोशल मीडिया आर्मी की जरूरत थी।

  • हर बूथ पर 10 डिजिटल योद्धा तैयार करना: पार्टी का मुख्य लक्ष्य उत्तर प्रदेश के हर एक पोलिंग बूथ पर कम से कम 10 ऐसे कार्यकर्ताओं को तैनात करना है जो स्मार्टफोन चलाने, डेटा ट्रैक करने और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे व्हाट्सएप व अन्य माध्यमों से जुड़ने में माहिर हों।

  • सरकारी योजनाओं का सटीक प्रचार: कार्यकर्ताओं को खुद यह पता होना चाहिए कि किस योजना का लाभ किसे और कैसे मिल रहा है, ताकि वे जनता के बीच जाकर विपक्ष के दुष्प्रचार का पुरजोर खंडन कर सकें।

यूपी बीजेपी मुख्यालय में बना 'कंट्रोल रूम', मंत्रियों-विधायकों को भी भेजे गए मैसेज

इस अभियान को कितनी गंभीरता से लिया गया, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लखनऊ स्थित बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में एक हाईटेक कंट्रोल रूम (Control Room) स्थापित किया गया था। यह कंट्रोल रूम रीयल-टाइम डेटा मॉनिटर कर रहा था कि किस जिले और किस ब्लॉक से कितने कार्यकर्ताओं ने परीक्षा दी है।

सूत्रों के मुताबिक, जिन मंत्रियों, सांसदों या विधायकों ने समय सीमा के भीतर इस डिजिटल लर्निंग परीक्षा को पास नहीं किया था, उन्हें कंट्रोल रूम से सीधे रिमाइंडर मैसेज और कॉल भेजे गए। इसी कड़ी मॉनिटरिंग का नतीजा रहा कि 40 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं के इस प्रशिक्षण अभियान में रिकॉर्ड 90% से ज्यादा लोग पास हो गए, जिसने यूपी को डिजिटल साक्षरता में पूरे देश में चैंपियन बना दिया है।

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