UP पंचायत चुनाव: प्रधान जी के उड़े होश! सरकार का ऐसा आदेश कि सब हैरान रह गए

UP पंचायत चुनाव: प्रधान जी के उड़े होश! सरकार का ऐसा आदेश कि सब हैरान रह गए

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की आहट के बीच ग्रामीण सियासत की सरगर्मियां अचानक तेज हो गई हैं। आगामी चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को न्यायसंगत राजनीतिक भागीदारी दिलाने की दिशा में शासन ने अपनी कवायद तेज कर दी है।

इसी कड़ी में बलिया कलेक्ट्रेट सभागार में 'उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' की एक बेहद अहम बैठक संपन्न हुई। उच्च न्यायालय के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुपालन में गठित इस आयोग की बैठक में पंचायत चुनाव के दौरान ओबीसी आरक्षण के जमीनी आंकड़ों, सामाजिक स्थिति और राजनीतिक हिस्सेदारी की गहन समीक्षा की गई।

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिले स्तर से संकलित किए गए डेटा का बारीकी से परीक्षण किया गया। बैठक का मुख्य फोकस उत्तर प्रदेश की 79 अधिसूचित पिछड़ी जातियों की वास्तविक स्थिति पर रहा। आयोग यह समझने की कोशिश कर रहा है कि त्रिस्तरीय पंचायतों में इन वर्गों को आबादी के अनुपात में कितनी वास्तविक राजनीतिक हिस्सेदारी मिल पा रही है।

आयोग के अध्यक्ष ने साफ किया कि सर्वोच्च न्यायालय के नियमों के तहत आरक्षण की कुल सीमा 50 फीसदी तय है, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू है। आयोग विभिन्न जिलों की वास्तविक परिस्थितियों का अध्ययन कर रहा है, ताकि एक ठोस और तथ्यपरक रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा सके।

यह पूरी कवायद इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि आयोग की अंतिम सिफारिशों के आधार पर ही आने वाले समय में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC), ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्यों की आरक्षण सूची तय होगी। हालांकि अभी तक सीटों के रोटेशन या आरक्षण में किसी आधिकारिक बदलाव का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन आयोग के इस जमीनी सर्वे से संभावित दावेदारों में हलचल बढ़ गई है। ग्रामीण इलाकों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे भावी प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों की नजरें अब आयोग की अंतिम संस्तुति और उस पर आने वाले सरकारी फैसले पर टिकी हुई हैं।