जब 10 हजार लोग कर रहे थे CM का विरोध, तब खुद मुख्यमंत्री ने सभी के लिए बनवाई पड़ी सब्जी; कहा- विरोध करो मगर भरे-पेट

जब 10 हजार लोग कर रहे थे CM का विरोध, तब खुद मुख्यमंत्री ने सभी के लिए बनवाई पड़ी सब्जी; कहा- विरोध करो मगर भरे-पेट

सियासत की दुनिया में विरोध, नारेबाजी और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना बेहद आम बात है। मगर क्या आपने कभी सुना है कि किसी मुख्यमंत्री के विरुद्ध हजारों लोग सड़कों पर उग्र प्रदर्शन कर रहे हों और वही मुख्यमंत्री आगे बढ़कर उन प्रदर्शनकारियों के खाने-पीने का इंतजाम करवा दे?

यूपी की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्त से जुड़ा यह दिलचस्प और मानवीय किस्सा आज भी बड़े गर्व के साथ सुनाया जाता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान यूपी के पूर्व सीएम चंद्रभानु गुप्ता की इस प्रेरक कहानी को याद कर स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा की मिसाल पेश की थी।

मुख्यमंत्री के विरुद्ध 10 हजार लोगों का बड़ा प्रदर्शन, खाने का संकट

उत्तर प्रदेश की राजनीति में चार बार प्रदेश की बागडोर संभालने वाले चंद्रभानु गुप्त का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। वे अपनी प्रशासनिक पकड़, सादगी और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए जाने जाते थे।

राजनाथ सिंह ने लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में उनके कार्यकाल का एक ऐतिहासिक किस्सा साझा किया। जब चंद्रभानु गुप्त यूपी के मुख्यमंत्री थे, तब उनके विरुद्ध करीब 10 हजार लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे थे। खास बात यह थी कि इस प्रदर्शन में देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी शामिल थे। यह प्रदर्शन काफी लंबा खिंच गया, जिससे वहां मौजूद हजारों प्रदर्शनकारियों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया।

राजनीतिक मतभेद किनारे रख भूखे प्रदर्शनकारियों के लिए बनवाई पूरी-साग

जब मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्त को खबर मिली कि उनके विरुद्ध नारेबाजी कर रहे लोग भूखे हैं, तो उन्होंने राजनीतिक मतभेद और विरोध को तुरंत एक तरफ रख दिया। उन्होंने एक संवेदनशील प्रशासक का परिचय देते हुए अधिकारियों को तुरंत आदेश दिए और सभी 10 हजार प्रदर्शनकारियों के लिए पूरी-साग बनवाने का व्यापक प्रबंध कराया। उनका साफ मानना था कि लोकतंत्र में विरोध जायज है, मगर उनके राज्य में कोई भी नागरिक या विरोधी भूखा नहीं रहना चाहिए।

'राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, मनभेद नहीं'

राजनाथ सिंह ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि लोकतंत्र में विरोध होना स्वाभाविक है, मगर विरोधियों के प्रति सम्मान और मानवीय दृष्टिकोण होना बेहद जरूरी है। चंद्रभानु गुप्ता का यह आचरण संदेश देता है कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं मगर मनभेद कभी नहीं होने चाहिए। विरोध करने वालों के प्रति भी संवेदनशीलता ही सच्चे लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और यही वजह है कि चंद्रभानु गुप्त जनता के बीच हमेशा लोकप्रिय रहे।

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