जब अदालत में जज को ही 'आदेश' देने लगा याचिकाकर्ता; सुप्रीम कोर्ट में हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद लखनऊ के दो लॉ छात्र गिरफ्तार

जब अदालत में जज को ही 'आदेश' देने लगा याचिकाकर्ता; सुप्रीम कोर्ट में हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद लखनऊ के दो लॉ छात्र गिरफ्तार

देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में एक ऐसा हैरान करने वाला वाकया सामने आया है, जिसने न्याय के मंदिर की सुरक्षा और गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सर्वोच्च न्यायालय के कक्ष संख्या 13 में सुनवाई के दौरान हंगामा करने, जजों के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने और कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में कानून की पढ़ाई कर रहे दो छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली की तिलक मार्ग पुलिस ने इस मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 132, 221, 224 और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों को दो दिन की पुलिस रिमांड पर ले लिया है।

लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने पार की मर्यादा की सीमा

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान कानून के छात्रों के रूप में हुई है, जो बेहद चिंताजनक है। इस पूरे हंगामे का मुख्य सूत्रधार 24 वर्षीय प्रबल प्रताप सिंह है, जो लखनऊ विश्वविद्यालय में एलएलबी तृतीय वर्ष का छात्र है। वहीं उसका साथ देने वाला दूसरा आरोपी 23 वर्षीय चंद्र भान है, जो इसी विश्वविद्यालय में विधि द्वितीय वर्ष का छात्र है। जो छात्र आने वाले समय में कानून के रक्षक बनने की तैयारी कर रहे थे, आज वही अदालत की अवमानना और पुलिस कस्टडी में पहुंच चुके हैं।

"जस्टिस, मैं आपको आदेश देता हूँ..." और अदालत में मच गया हड़कंप

यह पूरी घटना उस समय घटी जब न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की अवकाशकालीन पीठ के सामने एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी। मुख्य आरोपी प्रबल प्रताप ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी, जिसमें उसकी निजी शिकायत को एफआईआर में बदलने की अर्जी खारिज कर दी गई थी।

जैसे ही मामले की पुकार हुई, खुद पैरवी कर रहे प्रबल प्रताप ने पीठ के सामने बेहद आपत्तिजनक और असामान्य लहजे में कहा, "माननीय न्यायिक सेवक, मैं आपको लखनऊ के विकास नगर स्थित एसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देता हूं।" इस बात को सुनकर न्यायमूर्ति विश्वनाथन अवाक रह गए और उन्होंने तपाक से पूछा, "क्या आप हमें आदेश दे रहे हैं?"

सुरक्षाकर्मियों से हाथापाई और मेडिकल जांच में बड़ा खुलासा

जज के टोकते ही आरोपी का आपा खो गया। उसने आनन-फानन में केस से जुड़े कानूनी दस्तावेज हवा में उछाल दिए और देश के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अमर्यादित व अपशब्दों का प्रयोग शुरू कर दिया। जब वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उसे काबू करने की कोशिश की, तो आरोपी ने ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ के साथ धक्का-मुक्की और बल प्रयोग भी किया। सुरक्षाबलों ने तुरंत दोनों को हिरासत में लेकर कोर्टरूम से बाहर निकाला।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोनों आरोपियों का आईएचबीएएस (इल्हास) में गहन मानसिक परीक्षण कराया गया। डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट में साफ हो गया है कि दोनों आरोपी पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें किसी भी तरह के मानसिक उपचार की जरूरत नहीं है, यानी यह कृत्य पूरी तरह सोच-समझकर किया गया था। पुलिस को तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से कुछ आपत्तिजनक पर्चे भी मिले हैं, जिसकी जांच की जा रही है। इस बड़े व्यवधान के बाद भी पीठ ने अपना धैर्य नहीं खोया और दिनभर की अदालती कार्यवाही को शांतिपूर्वक संपन्न किया।

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